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A Billion Ideas ब्लॉगर्स मीट में मेरा आइडिया

रविवार को दिल्ली के होटल रैडिसन ब्लू (Raddisson Blu Hotel) में ब्लॉगर्स मीट (Bloggers Meet) का आयोजन किया गया था, जिसका विषय था 'हमारा भारत कैसा होना चहिए'। उसमें मैंने पहले सत्र (Session) में  'चुनाव सुधार'' पर अपने विचार प्रस्तुत किए एवं दूसरे सत्र में अपने पाँच सदस्य समूह (Group) की तरफ़ से 'देश के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने में सुधार' पर सुझाव प्रस्तुत किए!

'चुनाव सुधार'' (Election Reform) पर बात करते हुए मैंने बताया कि आज के हालात में चुने गए प्रतिनिधि सामान्यत: केवल क्षेत्र की 15-20 प्रतिशत जनता का ही प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसका मतलब है कि 80-85 प्रतिशत मतदाता जीते गए प्रत्याशी के खिलाफ होते हैं। और यही कारण है कि क्षेत्र के प्रतिनिधि पूरे क्षेत्र के प्रतिनिधित्व की जगह केवल खास मतदाताओं को रिझाने के लिए कार्य करते हैं. देश में इस स्थिति में बदलाव की बेहद आवश्यकता है, जिसके लिए मैंने सुझाव दिया कि  विधानसभा अथवा लोकसभा के चुनाव का प्रत्याशी की पात्रता (Eligibility) पिछले चुनाव में प्राप्त एक निर्धारित वोट संख्या (Minimum Vote Count) के आधार पर होनी चाहिए।

अर्थात इसके लिए किसी भी प्रत्याशी को सबसे पहले निगम पार्षद (Councillor) का चुनाव लड़ना चाहिए और विधानसभा (Assembly) के चुनाव में केवल उन ही प्रत्याशियों को अवसर मिलना चाहिए जो निगम पार्षद का चुनाव जीत चुके हों या फिर  ऐसे प्रत्याशी जिनको नगर निगम अथवा पिछले विधानसभा (Assembly) चुनाव  में कम से कम इतने वोट मिले हों कि उनकी ज़मानत बच गई हो या इसके लिए अलग से कोई 'न्यूनतम वोट संख्या' (Minimum Vote Count) निर्धारित की जा सकती है। और ठीक इसी तरह लोकसभा (Member of Parliament) चुनाव में विधानसभा चुनाव अथवा पिछले लोकसभा परिणामों को आधार बना कर प्रत्याशियों का चुनाव होना चाहिए।

'देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरुप' विषय पर सामूहिक चर्चा (Group Discussion) के बाद जो सुझाव मैंने पेश किये, उसमें मेरे विचार यह थे:
  1. किसी भी धार्मिक संगठन / आयोजन को सरकार की ओर से दिए जाने वाले आर्थिक लाभ पर रोक लगनी चाहिए, बल्कि इसकी जगह धार्मिक आयोजनों को सुविधाजनक (facilitate) बनाया जाना चाहिए।
  2. सार्वजानिक जगह पर धार्मिक आयोजनों पर रोक लगनी चाहिए, क्योंकि यह प्रभावित होने वाले लोगो के मनवाधिकार का उल्लंघन है और अक्सर झगडे/फसाद का कारण भी होते हैं।
  3. प्राथमिक शिक्षा के द्वारा हर एक धर्म की सही-सही जानकारी दी जानी चाहिए जिससे एक-दूसरे धर्म के विरुद्ध समाज में फ़ैली गलत धारणाओं की समाप्ती हो।
  4. सामाजिक / धार्मिक संगठनों को जवाबदेह (Accountable) बनाया जाना आवश्यक है, छुपे हुए दान पर रोक लगनी चाहिए और खातों की जानकारी सार्वजानिक होनी चाहिए। मेरा विचार है कि अगर धर्म से आर्थिक लाभ को दूर कर दिया जाए तो अनेकों मठ और उनके अंधविश्वास स्वत: समाप्त हो जाएंगे, जो कि अपनी दादागिरी की इच्छा के चलते समाज को बाटने के काम में लगे हुए हैं।

इसके अलावा वहाँ राजीव तनेजा, इरफ़ान भाई और वंदना गुप्ता जैसे कई पुराने ब्लॉगर मित्रों से मिलना हुआ और डॉ पवन मिश्र, ज़कारिया खान और वसीम अकरम त्यागी जैसे कई ऐसे दोस्तों से भी मिलना सम्भव हुआ जिनसे पुरानी दोस्ती है मगर रु-बरु पहली बार हुए।

राजीव भाई और वसीम भाई के कैमरे से खींचे कुछ फोटो ग्राफ्स आपकी नज़र हैं:

















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गायब होती टिप्पणियों का राज़ - शाहनवाज

हमने ब्लॉग बुलेटिन पर गायब होती टिप्पणियों का राज़ क्या बताया, गूगल बाबा हमसे नाराज़ हो गए और हमारी पोस्ट की फीड को गूगल रीडर पर अपडेट करने से इंकार कर दिया. दोपहर ब्लॉग बुलेटिन पर पोस्ट डाली थी और फीड है कि अब तक अपडेट नहीं हुई है. अब जब फीड अपडेट नहीं हुई है तो पाठकों तक नई पोस्ट की खबर कैसे पहुंचेगी भला? बताता चलूँ कि हर एक ब्लॉग की पोस्ट गूगल रीडर के द्वारा ही फोलोवर्स तक पहुँचती है, चाहे वोह सीधे रीडर पर जाकर, ब्लोगर डेश बोर्ड पर अथवा अपने ब्लॉग पर लगे विजेट पर ताज़ा पोस्ट पढ़ पाते हैं. यहाँ तक कि हमारीवाणी जैसे ब्लॉग संकलक भी तभी पोस्ट अपडेट कर पाते हैं.

इस अकस्मक समस्या के हल के लिए हमने यह रास्ता निकला है. अब देखते हैं गूगल बाबा नज़रे करम करते हैं कि नहीं. आप तब तक नीचे दिए लिंक पर जाकर देखिये गायब होती टिप्पणियों का राज़ तथा ब्लॉग जगत की ताज़ा हलचल.

ब्लॉग बुलेटिन: गायब होती टिप्पणियों का राज़ - शाहनवाज़






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ब्लॉग को वेबसाइट में कैसे बदलें? - ब्लॉग बुलेटिन

आजकल ईमेल तथा ब्लॉग हैकिंग की खबरे आम हैं, इसलिए अक्सर अपने ब्लॉग का बैकअप लेते रहिये. इसके लिए  ब्लॉग सेटिंग ((Settings) में जाना पड़ेगा, डेश बोर्ड से किसी ब्लॉग की सेटिंग सेक्शन में जाने के लिए सबसे पहले ब्लॉग के नाम के नीचे लिखे "सेटिंग्स" (Settings) पर क्लिक करना है।


सेटिंग में पहुँच कर सबसे पहले "Basic" प्रष्ठ खुलता है, इसमें "ब्लॉग उपकरण" (Blog Tools) के अंतर्गत "ब्लॉग आयात करें  (Import blog) - ब्लॉग निर्यात करें (Export blog) - ब्लॉग हटाएँ" (Delete Blog) नामक 'टेब' नज़र आएँगे। हर एक ब्लॉग की सभी पोस्ट और टिप्पणियां एक XML फाइल में सुरक्षित (Save) होती है। अपने ब्लॉग XML फाइल को आप कभी भी अपने कम्प्यूटर में कॉपी (डाउनलोड) कर सकते हैं अथवा अपने कंप्यूटर से अपने ब्लॉग पर अपलोड कर सकते हैं। 

"ब्लॉग आयात करें" (Import Blog): XML फाइल कंप्यूटर से ब्लॉग के सर्वर पर अपलोड करने के लिए तथा 
"ब्लॉग का निर्यात करें" (Export blog): ब्लॉग की XML फाइल कंप्यूटर में Save अर्थात (डाउनलोड) करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इन दो टूल्स के द्वारा आप कभी भी अपनी ब्लॉग पोस्ट तथा टिप्पणियों का बैकअप अपने कंप्यूटर में सहेज कर रख सकते हैं और किसी दुर्घटनावश पोस्ट डिलीट होने पर उसी फाइल से वापस अपने ब्लॉग पर अपलोड कर सकते हैं.

अगर भविष्य में कभी भी ब्लॉग को समाप्त करना चाहेंगे तो इसे "ब्लॉग हटाएँ" (Delete Blog) पर क्लिक करके समाप्त किया जा सकता है।

आज के दौर में अधिकतर ब्लॉगर अपने ब्लॉग को blogspot.com नाम की जगह अपने खुद के डोमेन नेम के साथ खोलना चाहते हैं. इसके लिए बहुत ज्यादा तकनिकी जानकारी की आवश्यकता नहीं है.


स्वयं की ब्लॉग साईट: 
अपनी स्वयं की साईट बनाने के लिए आपको एक डोमेन नेम अर्थात अपने ब्लॉग का नाम खरीदना पड़ेगा, जैसे मेरे ब्लॉग का नाम www.premras.com है, और साथ ही अगर आप अपनी ब्लॉग-पोस्ट को अपने स्पेस में रखना चाहें तो होस्टिंग पैकेज भी खरीद सकते. होस्टिंग के अंतर्गत उपलब्ध जगह (स्पेस) और डाटाबेस के द्वारा ही ब्लॉग-पोस्ट को सेव किया जाता है.  

किसी अच्छी कंपनी से डोमेन नेम खरीदने का तकरीबन 600 रूपये का खर्च आता है. अगर आप केवल डोमेन नेम ही खरीदना चाहते हैं तो अपनी ब्लॉग पोस्ट blogger.com के द्वारा ही प्रकाशित कर सकते हैं. इसके लिए आपको डोमेन नेम खरीदने के बाद उसकी सेटिंग में कुछ बदलाव करने पड़ेंगे तथा blogger.com की सेटिंग में भी कुछ बदलाव करने पड़ेंगे.

इसके लिए उपरोक्त विधि द्वारा सेटिंग में पहुँचने के बाद प्रकाशन (Publishing) पर क्लिक करना है, आइये प्रकाशन टेब को समझते हैं. 

प्रकाशन (Publishing): अगर आप अपने ब्लॉग के पते के साथ blogspot.com को हटाना चाहते हैं तो डोमेन नेम खरीद कर इस टेब के द्वारा बिना होस्टिंग खरीदे अपनी वेबसाइट चला सकते हैं, इसके अतिरिक्त किसी ब्लॉग को नए पते के साथ भी जोड़ा जा सकता है। अगर डोमेन नेम खरीदना है तो यह गूगल से भी खरीदा जा सकता है अथवा अपनी पसंद की किसी और कंपनी से भी खरीद सकते हैं। इसके लिए "प्रकाशन" (Publishing) पर क्लिक करने के बाद "कस्टम डोमेन" (Custom Domain) पर क्लिक करना है, अगर डोमेन गूगल से खरीदना चाहते है तो यहाँ नाम के उपलब्ध होने की जांच की जा सकती है, किसी और कंपनी से खरीदना चाहते हैं या पहले से खरीदा हुआ है तो "उन्नत सेटिंग्स पर जाएँ" (Switch to advanced settings) पर क्लिक करना है। नए खुलने वाले प्रष्ट पर लिखे "सेटअप निर्देश" (setup instructions) पर क्लिक करके डोमेन की सेटिंग की जानकारी मिल सकती है। 

अगर आप अपने ब्लॉग को टॉप लेवल डोमेन (top-level domain) जैसे कि www.premras.com पर होस्ट करना चाहते हैं तो जिस कंपनी से डोमेन खरीदा है वहां लोगिन करके डोमेन की सी-नेम (CNAME) सेटिंग में www में लिखकर उसके होस्ट नेम में  ghs.google.com लिखना है. 

इसके साथ ही साथ आप चाहें तो 'ए रिकोर्ड्स' (A-records) में भी बदलाव कर सकते हैं. क्योंकि अगर ए रिकोर्ड्स नहीं डाला जाता है तो बिना www के साईट का नाम लिखने पर ब्लॉग नहीं खुलता है.  

इसके लिए ए रिकोर्ड्स (A-records) की सेटिंग में जाकर फॉर्मेट में डोमेन नेम (जैसे कि premras.com) लिखकर 'ए' (A) सेक्शन में गूगल की 4 निम्नलिखित आई.पी. एड्रेस को भरना है.

216.239.32.21
216.239.34.21
216.239.36.21
216.239.38.21


डोमेन सेटिंग पूरी करने के बाद "आपका डोमेन" (Your Domain) के आगे खरीदे गए डोमेन का पता भर कर प्रष्ट के नीचे लिखे तथा पर "yourdomain.com को www. yourdomain.com पर अग्रेषित करें" (Redirect yourdomain.com to www. yourdomain.com)  के आगे बने बॉक्स में क्लिक करके  "सेटिंग्स सहेजें" (Save) पर क्लिक कर दीजिये। अब आपका वही पुराना ब्लॉग आपके खरीदे गए डोमेन नेम पर खुलने लगेगा।

अपनी साईट / ब्लॉग को ब्लॉगर प्रोफाइल से जोड़ें:
इसके अलावा अगर आपने अपना ब्लॉग वर्डप्रेस अथवा किसी और सेटअप पर बनाया हुआ है तब भी आप उसे अपनी ब्लॉगर प्रोफाइल के साथ जोड़ सकते हैं. इसके लिए उपरोक्त सेटिंग में केवल  "आपका डोमेन" (Your Domain) के आगे अपनी साईट अथवा वर्डप्रेस ब्लॉग का पता भरना है और "सेटिंग्स सहेजें" (Save) पर क्लिक करना है. इससे आपकी साईट आपकी ब्लॉगर प्रोफाइल के साथ जुड़ जाएगी.



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आज के दौर में जानकारी ही बचाव है - ब्लॉग बुलेटिन









तकनिकी चर्चा, technical post, personal domain with blogger blogspot.कॉम

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थायरॉइड डिस्ऑर्डर और "ब्लॉग बुलेटिन" पर मेरी पहली ब्लॉग चर्चा

लिखावट में मेरी गरचे, निशाने जुनूँ नज़र आए.
तो मैं समझू फ़क़त, मेहनत मेरी कामयाब हो गयी. 

सभी मित्रों को शाहनवाज़ सिद्दीकी का 'प्रेम रस' में डूबा हुआ आदाब. यह मेरी पहली ब्लॉग्स चर्चा है, कुछ बेहतरीन ब्लॉग-पोस्ट से आप सभी को रु-बरु कराने की कोशिश करूँगा. मेरी इस पहली चर्चा की थीम स्वास्थ्य है, इसलिए सबसे पहले बात करते हैं स्वास्थ्य से जुडी कुछ जानकारियों की.

अगर आपका वज़न अचानक तेज़ी से घट या बढ़ रहा है तो यह थायरॉइड डिस्ऑर्डर का लक्षण हो सकता है, थायरॉइड डिस्ऑर्डर के प्रमुख लक्षणों में वज़न के घटने, बढ़ने के आलावा काम में मन ना लगना, उदास रहना, हड्डियों अथवा जोड़ों में दर्द प्रमुख हैं.

क्या होता है थायरॉइड?
हमारी बॉडी में बहुत-से एंडोक्राइन ग्लैंड्स (अंत: स्रावी ग्रंथियां) होते हैं, जिनका काम हॉर्मोन्स बनाना होता है। इनमें से थायरॉइड भी एक है, जो कि गर्दन के बीच वाले हिस्से में होता है। थायरॉइड से दो तरह के हॉर्मोन्स निकलते हैं : T3 और T4, जो हमारी बॉडी के मेटाबॉलिज्म को रेग्युलेट करते हैं। T3 10 से 30 माइक्रोग्राम और T4 60 से 90 माइक्रोग्राम निकलता रहता है। एक तंदुरुस्त आदमी के शरीर में थायरॉइड इन दोनों हॉर्मोन्स को सही मात्रा में बनाता है, जबकि गड़बड़ी होने पर ये बढ़ या घट जाते हैं। थॉयराइड डिस्ऑर्डर के कारण महिलाओं में बांझपन और पीरियड्स के अनियमित होने की प्रॉब्लम हो जाती है। शरीर में इन दोनों के लेवल को TSH हॉर्मोन कंट्रोल करता है। THS (Thyroid Stimulating Harmone) पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलने वाला एक हॉर्मोन है।

क्या है थायरॉइड डिस्ऑर्डर?
थायरॉइड ग्लैंड से निकलने वाले T3 और T4 हॉर्मोन्स का कम या ज्यादा होना थायरॉइड डिस्ऑर्डर कहलाता है।

कैसे होता है
- ज्यादातर मामलों में यह खानदानी होता है।
- खाने में आयोडीन के कम या ज्यादा होने से।
- ज्यादा चिंता करने, अव्यवस्थित खानपान और देर रात तक जागने से।
- कुछ दवाइयों से, जैसे Amiodarone जो कि दिल के मरीजों को दी जाती है और Lithium जो कि मूड डिस्ऑर्डर यानी मानसिक रूप से परेशान मरीजों को दी जाती है। इन दवाइयों को लंबे समय तक लेने से हॉर्मोन्स का लेवल कम-ज्यादा हो जाता है, जिससे थायरॉइड डिस्ऑर्डर हो जाता है।

कैसे पता चलता है
किसी को थायरॉइड डिस्ऑर्डर है या नहीं, इसके लिए यह चेक किया जाता है कि बॉडी में T3, T4 और TSH लेवल नॉर्मल है या नहीं। पहले लक्षणों और फिर जांच (थायरॉइड प्रोफाइल टेस्ट) से इसका पता चलता है।

कितने तरह का होता है :
मोटे तौर पर थायरॉइड डिस्ऑर्डर को दो भागों में बांटा जाता है :

1. हाइपोथायरॉइडिज्म: थायरॉइड में जब T3 और T4 हॉर्मोन लेवल कम हो जाए तो उसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहते है। इसमें TSH बढ़ जाता है।

2. हाइपरथायरॉइडिज्म: थायरॉइड में जब T3 और T4 हॉर्मोन लेवल अगर बढ़ जाए तो हाइपरथायरॉइडिज्म कहते है। इसमें TSH घट जाता है।

थायरॉइड डिस्ऑर्डर में पहले TSH चेक किया जाता है और अगर उसमें कोई घट-बढ़ पाई जाती है तो फिर T3 और T4 टेस्ट किया जाता है। पहली बार थायरॉइड टेस्ट कराने के बाद दूसरी बार टेस्ट तीन से छह महीने बाद करा सकते हैं। आजकल हॉमोर्न लेवल घटने यानी हाइपोथायरॉयडिज्म के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं। इसमें TSH बढ़ जाता है।

हाइपोथायरॉयडिज्म के कारण
- आयोडीन 131 ट्रीटमेंट से। यह ट्रीटमेंट हाइपरथायरॉइडिज्म के मरीजों को दिया जाता है, जो थायरॉइड के सेल्स को मारता है। इस ट्रीटमेंट में डोज के ज्यादा या कम होने से।

- थायरॉइड की सर्जरी से।

- गले की रेडिएशन थेरेपी से, जो कि ब्लड और गले का कैंसर होने पर दी जाती है।

- दवाइयों जैसे Lithium मानसिक रूप से परेशान मरीजों को दी जाती है, Anti-Thyroid Drugs थायरॉइड डिस्ऑर्डर को नॉर्मल करने के लिए, Interferon-Alfa हेपेटाइट्स और कैंसर के मरीजों को दी जाती है और Amiodarone जो कि दिल के मरीजों को दी जाती है, आदि से। ये दवाएं लंबे समय तक लेने से ही दिक्कत होती है।

- अगर पैदाइशी रूप से थायरॉइड ग्लैंड में हॉर्मोन बनने में गड़बड़ी हो या फिर थायरॉइड ग्लैंड हो ही न।

- अगर कोई पहले से ही थायरॉइड का ट्रीटमेंट ले रहा हो और उसे अचानक से बंद कर दे।

- TSH की कमी से।

- अगर किसी को हाइपोथैलमिक बीमारी हो। हाइपोथैलमस ब्रेन का ही एक पार्ट होता है, जिसमें किसी भी तरह की बीमारी जैसे ट्यूमर, रेडिएशन आदि होने से हाइपोथैलमिक बीमारी होती है, जिससे हाइपोथायरॉइडिज्म हो जाता है।


हाइपोथायरॉइडिज्म के लक्षण

बड़ों में
- भूख कम लगती है, पर वजन बढ़ता जाता है।
- दिल की धड़कन कम हो जाती है।
- गले के आसपास सूजन हो जाती है।
- हर काम में आलस जैसा लगने लगता है, थकावट जल्दी हो जाती है और कमजोरी आ जाती है।
- डिप्रेशन होने लगता है।
- पसीना कम आने लगता है।
- स्किन ड्राई हो जाती है।
- ठंड ज्यादा लगना (गर्मी में भी ठंड लगती है)
- बाल ज्यादा झड़ने लगते हैं।
- याददाश्त में कमी आ जाती है।
- कब्ज
- महिलाओं के पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। कुछ मामलों में पहले पीरियड्स कम होते हैं, फिर धीरे-धीरे बंद हो जाते हैं।
- कुछ लोगों में सुनने की शक्ति भी कम हो जाती है।

इलाज
पहले लीवोथॉयरोक्सिन (ये हॉर्मोन्स होते हैं) दिया जाता है, जिसकी डोज 50 माइक्रोग्राम से शुरू की जाती है और फिर TSH लेवल और जरूरत के मुताबिक इसकी डोज बढ़ाई जाती है। इसके साथ अगर मरीज की कोई ऐसी दवा चल रही हो, जोकि थायरॉइड के लेवल को घटा रही हो जैसे : Lithium, Amiodarone तो ऐसी दवाओं को रोक दिया जाता है क्योंकि ये दवाइयां हाइपोथायरॉइडिज्म करती हैं। इलाज का असर हो रहा है या नहीं, इसे दो तरह से आंक सकते हैं : पहला : ऐसे सुधार, जिन्हें मरीज खुद देख सकता है जैसे सूजन में कमी आना और दूसरा : जिसमें हॉर्मोन्स में सुधार आता है और जिनकी पहचान सिर्फ डॉक्टर ही कर सकता है।

बच्चों में
हाइपोथायरॉइडिज्म से पीड़ित पैदा नॉर्मल होता है लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होता जाता है, उसमें लक्षण दिखने लगते हैं। आमतौर पर यह आयोडीन की कमी से होता है।

- बच्चा गूंगा-बहरा पैदा होता है।
- बौना होता है, यानी उसकी उम्र के हिसाब से लंबाई कम होती है।
- लंबे समय तक पीलिया रहने लगता है।
- सामान्य बच्चों की तुलना में उसकी जीभ बड़ी होती है।
- हड्डियों का विकास धीमा होता है।
- नाभि फूलती जाती है।
- आई क्यू सामान्य बच्चों की तुलना में कम होता है।

जब कोई महिला प्रेग्नेंट होती है तो बच्चे को थायरॉइड न हो, इसके लिए मां को आयोडीन नमक वाला खाना दिया जाता है। लेकिन अगर पैदा होने के बाद बच्चे को थायरॉइड डिस्ऑर्डर हो जाता है तो उसे Iodized Oil दिया जाता है। इसमें एक एमएल में 480 मिली ग्राम आयोडीन होता है। आजकल थॉयरोक्सिन यानी Eltroxin टैब्लेट भी दी जाती हैं। 5 साल से कम के बच्चों को 8 से 12 माइक्रोग्राम से शुरू करते हैं और दिन में एक बार देते हैं। यह तब तक दी जाती है, जब तक बच्चा नॉर्मल न हो जाए।

हाइपरथायरॉइडिज्म
हाइपरथायरॉइडिज्म : इसकी जांच में T3, T4 बढ़ा हुआ और THS घटा हुआ रहेगा। साथ ही इसमें Thyroid Stimulating Immunoglobulin मिलता है। यह एक तरह का प्रोटीन होता है, जोकि थायरॉइड ग्लैंड में जाकर उसे ज्यादा निकालता है। इसी की वजह से यह बीमारी होती है।

कारण
- ग्रेव्स बीमारी से। यह आमतौर पर 20 से 50 साल तक की उम्र के लोगों में पाई जाती है और ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर से होती है। इसमें सारे लक्षण हाइपरथायरॉयडिज्म के होते हैं, जिसके ट्रीटमेंट में एंटी-थायरॉइड ड्रग सर्जरी की जाती है।
- ज्यादा मात्रा में आयोडीन खाने से।
- थायरॉइड हॉर्मोन ज्यादा लेने से।
- टॉक्सिक मल्टिनॉड्युलर ग्वाइटर और टॉक्सिक एडिनोमा हो जाने से। ग्लैंड में बहुत-सी गांठें होती हैं, जिनमें बहुत तेजी से हॉर्मोन्स बनने लगते हैं।

बड़ों में लक्षण
- वजन कम हो जाता है।
- दिल की धड़कन तेज होने लगती है।
- हर काम में जल्दी रहती है।
- चिड़चिड़ापन रहने लगता है।
- पसीना ज्यादा आने लगता है।
- स्किन में नमी ज्यादा रहती है।
- दिमागी तौर पर स्मॉर्टनेस और इंटेलिजेंस बढ़ जाती है।

थायरॉइड की सर्जरी के अलावा आयोडीन 131 और एंटी-थायरॉइड ड्रग्स जैसे Carbimazole, Methimazole और Propranolol आदि दी जाती हैं।

बच्चों में लक्षण
बच्चों में हाइपरथायरॉइडिज्म के मामले लगभग 5 पर्सेंट ही होते हैं, यानी उनमें हाइपरथायरॉइडिज्म के बजाय आमतौर पर हाइपोथायरॉइडिज्म ज्यादा होता है।

- गॉइटर (घेंघा) यानी गर्दन का साइज बढ़ जाना।
- मानसिक रूप से परेशान रहने लगेगा।
- बच्चे का किसी भी काम में, पढ़ाई और खेलकूद में ध्यान न लगना।
- भूख बढ़ जाना लेकिन वजन कम होना। मतलब, बच्चा खाना ज्यादा खाएगा लेकिन उसका वजन घटेगा।
- प्रोप्टोसिस यानी आंखों का ज्यादा बाहर आ जाना।

इसमें एंटी-थायरॉइड ड्रग जैसे Propylthioucacil और Methimazole दी जाती है। एक बार थायरॉइड लेवल नॉर्मल हो जाने पर दवाओं की डोज कम-से-कम स्तर पर ले जाते है। कितने लेवल पर ले जाना है, यह डॉक्टर तय करता है। इन्हें हॉर्मोन्स लेवल को कंट्रोल करने के लिए दिया जाता है।

होम्योपैथ
होम्योपैथ में भी थायरॉइड का इलाज मरीज के लक्षणों जैसे पर्सनैलिटी, बॉडी टाइप (मोटा-पतला), मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, फैमिली मेडिकल हिस्ट्री, मरीज के शरीर की संवेदनशीलता आदि के आधार पर ही किया जाता है। होम्योपैथ में TSH को नॉर्मल करने के लिए दवा दी जाती है।

दवाएं
लांकि लक्षणों को देखकर ही दवा और डोज दी जाती है। लेकिन कुछ दवाएं हैं, जो आमतौर पर थायरॉइड के सभी मरीजों को दी जाती है। वे हैं :

- Calcarea Carb 30, 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।

- Graphites 30, 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।

- Thuja Occ 30 , 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।

- Phosphorus 30, 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।

- Lachesis 30, 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।

ध्यान रखें : दवा खाने से 15-20 मिनट पहले और बाद में कुछ भी न खाएं। मुंह में कोई भी तेज खुशबू वाली चीज होगी तो दवा असर नहीं करेगी।

आयुर्वेद
आयुर्वेद में भी ज्यादा चिंता, शोक में रहना और अव्यवस्थित खानपान को थायरॉइड डिस्ऑर्डर का मुख्य कारण माना गया है।

लक्षणों को देखकर ही इलाज किया जाता है लेकिन सामान्य रूप से इसके लिए आरोग्यवर्द्धनी वटी (एक गोली), गुग्गुल (एक गोली), वातारि रस (एक गोली) और पुनर्नवादि मण्डूर (एक गोली) दवा दी जाती है। ये दवाएं सुबह-शाम गर्म पानी से कम-से-कम तीन महीने लेनी होती हैं। थायरॉइड डिस्ऑर्डर में घरेलू नुस्खों से ज्यादा फायदा नहीं होता।

योग
थायरॉइड डिस्ऑर्डर गले से जुड़ी बीमारी है, इसलिए जो भी प्राणायाम आदि गले में खिंचाव, दबाव या कंपन पैदा करे, उन्हें मददगार माना जाता है।

थायरॉइड डिस्ऑर्डर होने पर :

- कपालभाति क्रिया के तीन राउंड पांच मिनट तक करें।

- उज्जयिनी प्राणायाम 15 से 20 बार दोहराएं।

- गर्दन की सूक्ष्म क्रियाएं करें, जिसमें गर्दन को आगे-पीछे और लेफ्ट-राइट घुमाएं।

- लेटकर सेतुबंध, सर्वांग और हलासन, उलटा लेटकर भुजंग और बैठकर उष्ट्रासन, जालंधर बंध आसन करें। सभी आसन 2 से 3 बार दोहराएं।

नोट : सर्वांग और हलासन गर्दन, कमर दर्द, हाई बीपी और हार्ट की बीमारियों में न करें। बाकी आसन कर सकते हैं।

थायरॉइड डिस्ऑर्डर हो ही न, इसके लिए इन सभी आसनों और प्राणायाम को रोजाना करने के साथ ही रोजाना सैर पर जाएं। रेग्युलर ऐसा करने से थायरॉइड डिस्ऑर्डर कुछ ही दिनों में कंट्रोल हो जाता है।

क्या खाएं
- हल्का खाना जैसे दलिया, उबली सब्जियां, दाल-रोटी आदि खाएं।
- हरी सब्जियां और कम घी-तेल और मिर्च-मसाले वाला खाना खाएं।

क्या न खाएं
- बैंगन, चावल, दही, राजमा, अरबी आदि।
- खाने की किसी भी चीज को ज्यादा ठंडा और ज्यादा गर्म न खाएं।
- तला खाना जैसे समोसे, टिक्की आदि न खाएं।

INMAS (Istitute of Nuclear Medicine and Allied Science)
यह मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस का एक इंस्टिट्यूट और खासकर थायरॉइड का बड़ा हॉस्पिटल है।

- यहां जनरल ओपीडी नहीं है। सिर्फ किसी एम. डी. डॉक्टर के रेफर पर ही यहां इलाज किया जाता है।

- सुबह 7:30 से 11 बजे तक नंबर मिलते हैं, 8:30 से 11 बजे तक कार्ड बनाए जाते हैं और सुबह 9 से 11:30 बजे तक डॉक्टर मरीजों को देखते हैं।

- कार्ड 10 रुपये में बनता है और इसी पर इलाज के पूरे होने तक दवाइयां लिखी जाती है, जोकि बाहर से खरीदनी होती हैं।

फोन नंबर : 011- 2390 5327

पता : INMAS, तीमारपुर-लखनऊ रोड, तीमारपुर, दिल्ली-110 054, दिल्ली यूनिवर्सिटी मेट्रो स्टेशन के पास।

एक्सपर्ट्स पैनल :
- डॉ. के. के. अग्रवाल, सीनियर कंसलटेंट, मूलचंद हॉस्पिटल
- डॉ. ओमप्रकाश सिंह, मेडिकल ऑफिसर, ई. एस. आई. हॉस्पिटल
- डॉ. शुचींद्र सचदेवा, सीनियर होम्योपैथ
- एल. के. त्रिपाठी, वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक
- सुरक्षित गोस्वामी, योग गुरु

नोट : ऊपर बताई गई एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक किसी भी दवा को डॉक्टर की सलाह के बिना अपने आप न लें। एलोपैथी में बताई गई सभी दवाइयों के नाम उनके जेनरिक नेम हैं। बाजार में ये अलग-अलग नामों से मिलती हैं।

साभार: नवभारत टाइम्स





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मैं स्वयं हाइपरथायरॉइडिज्म का शिकार रहा हूँ, खुदा का शुक्र है कि इससे निजात पा सका...

मैंने भी अपने डॉक्टर की सलाह से इसका इलाज इनमास (INMAS) से ही कराया है. बहुत ही बेहतरीन अस्पताल है. इसलिए तभी सोचा था कि थायरॉइड डिस्ऑर्डर के ऊपर जानकारी इकठ्ठा करके सभी के सम्मुख रखूँगा.


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अजब सांपला की गज़ब कहानी

यूँ तो हिंदी जगत में ब्लॉगर मिलन अक्सर होते हैं और अक्सर यह चर्चा भी रहती है कि ब्लॉगर मीट सार्थक होती है अथवा नहीं. हालाँकि सार्थकता के मायने हर इक के लिए अलग होते हैं, फिर भी एक सार्थक बात तो हर एक ब्लॉगर मीट में होती ही है और वह है दिलों का मिलना. आज जहाँ हर ओर नफरत के गीत गाए जा रहे हैं ऐसे में मुहब्बत के माहौल में मिलना-मिलाना खुशगवार हवा के झौंको से कम बिलकुल भी नहीं है.

मिलने-मिलाने की आड़ में, 
आपस में दिल मिलते रहे

बस 'प्रेम रस' बढ़ता रहे,
यूँ इश्कियां फूल खिलते रहे.

अगर बात अपनी कहूँ, तो हर एक ब्लॉगर मीट में बहुत कुछ सीखने का मौका मिला है. आभासी दुनिया  से निकल कर असल दुनिया में ब्लॉगर बंधुओं से मिलने पर जिम्मेदारियों का एहसास हुआ. इस बार भी कई साथियों से तकनिकी स्तर पर बहुत सारी सार्थक वार्ताएं हुई. बहुत सी बातें सीखी और बहुत से साथियों को बहुत सारी बातें सिखाने का वादा हुआ. बल्कि मेरे विचार से तो हर एक ब्लॉगर मीट में तकनिकी कार्यशाला का इंतजाम अवश्य होना चाहिए.

चलिए अब चलते 'अजब' सांपला  (के ब्लॉगर मिलन) की 'गज़ब' कहानी की ओर:-



हर एक धांसू कहानी की तरह यहाँ भी, धुरंधर 'अजय कुमार झा' की 'धमाकेदार एंट्री'


डायरेक्शन टीम से अंतर सोहिल तथा  राज भाटिया जी अजय झा को सीन समझाते हुए 


थोड़ी देर बाद ही दूसरी टीम भी लाल कारपेट पर चलने की बेताबी लिए आ पहुंची.



सबसे पहले कैमरों की निगाह  ब्लॉगिंग के रजनीकांत 'महफूज़ अली' पर पड़ी


कैमरों को देखने के बाद इनका 'अंदाज़' देखिये ज़रा


उनके पीछे-पीछे श्रीमती संजू तनेजा तथा मुकेश कुमार सिन्हा भी गर्म जोशी से आते हुए दिखाई दिए


आते ही गलियारों में चर्चा शुरू हो गई, हर कोई महफूज़ भाई की इस बेहतरीन शक्सियत की महफूज़गी  का राज़ जानने को उत्सुक नज़र आ रहा था और 'वह बताने में'!
(बाएँ से) हँसते रहो फेम राजीव तनेजा, श्रीमती राज भाटिया, श्रीमती संजू तनेजा तथा महफूज़ अली.


अंजु चौधरी से बतियाते महफूज़ भाई



कुछ फोटो खींचने में तो खुछ देखने में मशगूल!



और अजय भाई जायज़ा लेने में मशगूल!



हो जाए एक ग्रुप फोटो 




एक और बड़ी सी ग्रुप फोटो!!!



मशहूर चर्चाकार वंदना जी केवल राम से चर्चा करते हुए.


रिश्तों की यह गर्मजोशी तो देखिये



बात और भी आगे बढती हुई...


चेहरों पर मिलने की इतनी ख़ुशी देखने के बाद भी सार्थकता में कुछ कमी रह गयी है क्या?
(जाट देवता के साथ महफूज़)


ब्लॉग्गिंग के गुर सीखते-सीखाते एक छोटी कार्यशाला...


लीजिये नाश्ते का समय हो गया...


हमारे कैमरे की पसंदीदा  डिश 'बिस्कुट्स', हालाँकि हमें तो पकौड़े अधिक पसंद आए.



शायद बताया जा रहा है सौ-सौ टिप्पणियों का राज़ :-)


संजू भाभी राजीव तनेजा को समझा रही है कि ज्यादा खर्चा मत करो, अभी थोड़ी देर पहले तो जेब खर्ची दी थी... क्या सब उड़ा दिया?


और महफूज़ भाई का यहाँ कहना है कि ब्लॉग्गिंग का यही मज़ा है, जितना मर्ज़ी पकौड़े खाओ, सेहत फिर भी तंदुरुस्त रहती है...


यह देखिये, दिखा-दिखा कर खाया जा रहा है.


थोड़ी देर से ही सही खुशदीप भाई की टीम भी आ पहुंची, आते ही उनका स्वागत किया इंतज़ार करते कैमरों के फ्लैश ने. इतने कैमरे चलने लगे कि उनको ऑंखें खोलना भी मुश्किल हो गया है जी...


एक शानदार पोज़ देते हुए... (बाएँ से) खुशदीप सहगल, सर्जना शर्मा जी तथा श्रीमती एवं श्री राकेश कुमार जी


लो जी गन्ना प्रतियोगिता शुरू हो गयी है...


फिर से एक ग्रुप फोटो...


श्रीमती एवं श्री राज भाटिया जी मेहमानों का इस्तक़बाल करते हुए...


परेशान मत होइए, यहाँ कुछ गुस्सम-गुसाई नहीं हो रही है... टिप्पणियों के लेन-देन पर चर्चा भी नहीं हो रही है, बल्कि ब्लोगिंग पर गंभीर चिंतन हो रहा है भय्या!!!


लीजिये हम भी आ गए एक ग्रुप फोटो के लिए...


गर्मजोशी यहाँ भी है...


और यहाँ भी...

यह वाला फोटू तो देखिये ज़रा...



एक ग्रुप बैठ कर भी नज़ारा ले रहा है...




और बाहर गन्ना प्रतियोगिता और फोटो सेशन साथ-साथ


चलिए यहाँ भी चर्चा शुरू हो गयी...


गन्ना प्रतियोगिता चालू है...



गन्ना पकड़ कर ब्लॉग चर्चा कैसे की जा सकती है, यही समझा रही हैं वंदना जी श्रीमती भाटिया जी को...


लीजिये अलबेला खत्री जी भी पहुँच गए. संजय भास्कर स्वागत करते हुए...


और पद्म भाई की पद्मवाली का जायजा लेते हुए अजय भाई...



अब बारी आई अपनी-अपनी बात कहने की...


इंदु जी का प्यार और दुलार देखकर ख़ुशी के आंसू झलकने लगे...


देखिये कैसी तन्मयता से सुना जा रहा है...


दूसरी और का द्रश्य भी देख लीजिये...


ब्लॉगप्रहरी कनिष्क कश्यप अपनी बात रखते हुए....


एक अलग अंदाज़....


यह शायद 'मेरे विचार मेरे ख्याल' ब्लॉग वाले सुशील गुप्ता जी हैं...


और जब खुशदीप भाई बोले तो सब एक सुध होकर सुनते ही रह गए....




राजीव भाई ने कहा..... हँसते रहो



अंजु चौधरी बोल रही है और कई कैमरे उनका पीछा कर रहे हैं...



संजू भाभी ने भी अपनी बात रखी....


वंदना जी के समय लाईट थोड़ी कम हो गयी थी...


सर्जना जी भी ब्लोगिंग और मीडिया के कई राज़ खोले...


केवल और केवल 'केवल' भाई...



और आई अब अजय भाई की बारी....


एक-एक पॉइंट कुछ इस अंदाज़ में बयां हो रहा है...


ज़रा यह अंदाज़ तो देखिये..



लीजिये खाना शुरू हो गया...



महफूज़ भाई की सेहत का राज़ तो लगता है कि बस पापड़ खा कर ही काम चलाने वाले हैं.... :-)



अलबेला जी कह रहे हैं कि 'महफूज़ सिर्फ पापड़ खाने से पेट नहीं भरेगा'



बातें छोडो, खाना खाओ यार...


ब्लॉग-चर्चा


कुंवर जी अकेले ही?



अलबेला-शाह



इतनी गभीरता??? या फिर पोज़ देने में शर्मा रहे हैं?


फोटो खिचवाना हो तो ऐसे खीचवाइए  ना...


या फिर ऐसे....
(व्यंजना शुक्ल के साथ योगेन्द्र मौदगिल)


सिक्योरिटी का भी पूरा इंतजाम था, हर कोने-कोने पर नज़र रखी जा रही थी... ताकि कोई परिंदा भी पर ना मार सके...



विदाई का समय नज़दीक है...


और यह आखीर वाला पोज़...



कीर्ति नगर मेट्रो स्टेशन पर...



अजय भाई अपने कैमरे के फोटो जांचते हुए....


लीजिये मेट्रो आ गयी...



जब इत्ते फोटो झेल ही लिए हैं तो यह अखीर वाला हमारा फोटू भी झेल लो भय्या...

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