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व्यंग्य: सुपरपावर का ‘सरेंडर स्पेशल’!

सभ्यता खत्म करने का ठेका लेकर निकले ट्रम्प आखिर खुद ही “सरेंडर स्पेशल” लेकर बैठ गए। दुनिया को डराने निकले थे, और खुद ही डरावनी फिल्म का कॉमेडी सीन बन गए! 🤪

250 साल पुरानी एक महान अमेरिकी सभ्यता की हालत अब ऐसी लग रही है जैसे पुराना स्मार्टफोन — दिखता अभी भी “प्रो”, पर अंदर से हैंग! एटॉमिक ताकत का जो ढोल पीटा गया था, वो निकला वही — दूर से धांसू, पास से फुस्स पटाखा।

अब दुनिया भर के देश लाइन में खड़े हैं — “भाईसाहब, जो नुकसान हुआ है उसका UPI ID दीजिए, क्लेम भेजना है!” और अगर पैसे की दिक्कत हो, तो ट्रम्प टावर की “क्लियरेंस सेल” लगा दो — “आज लो, कल पछताओ ऑफर” 😄

और इस युद्ध के बाद की असलियत यह है कि — दुनिया की “सुपरपावर” वाली कुर्सी अब अमेरिका के नीचे से खिसककर रूस, चीन और ईरान के पास चली गई है। अमेरिका का हाल ऐसा कि जैसे इंटरव्यू में बहुत अंग्रेज़ी झाड़ी, और आख़िर में “We’ll get back to you” सुनकर घर आ गया। 😂

निष्कर्ष: शोर बहुत था, शो कम निकला… 

और अंत में अमेरिका वही निकला — 
“बड़ा खिलाड़ी, लेकिन खाली पिच”! 😜

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यह कौन से राजनेताओं की फोटो है?

Guess who are the politicians in the following picture?












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राजनेताओं के पोस्टर देखकर ख़याल आता है

सच-सच बताना...









अगर आपका सहमत हैं तो कहिये फिर











Keywords: humour, politics, politician, dumb, bewakoof, janta, people

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बेचारे ड्राइवर रहते हैं चौबीस घंटे बस में :-)


एक यात्री ने उत्सुक्तावश  ड्राइवर से मालूम किया: 

ड्राइवर साहब आप बस में कितने घंटे रहते हैं?




ड्राइवर भी हाज़िर जवाब था, फट से यात्री से बोला: 

चौबीस घंटे।



यात्री ने हैरानगी दिखाते हुए मालूम किया:

यह कैसे संभव है?



ड्राइवर फट से बोला:

मित्र, आठ घंटे सरकार की बस में और सौलह घंटे पत्नी के बस में!

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कांग्रेस को नानी याद आ गई!


घर में चार दिन औरत ना हो तो घर का हल कैसा हो जाता है... यह तो कोई कांग्रेस से पूछे... :-)

क्या हाल बना रखा था अन्ना के अनशन के कारण. हर दांव उल्टा पड़ रहा था. आखिरकार विपक्ष का सहारा लेना पड़ा.

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दुश्मनों को कुछ ऐसे डराते हैं हमारे गृहमंत्री!

गृहमंत्री: यह हमला केवल मुंबई पर नहीं, बल्कि पुरे देश पर हमला है। यह भारत की एकता, अखंडता और समृद्धि पर किया गया हमला है। पानी सर से ऊपर जा चुका है, देश ऐसी हरकतों को हरगिज़-हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करेगा। देश के दुश्मनों पर कड़े से कड़े कदम उठाए जाएँगे!

मैं देशवासियों से आह्वान करता हूँ कि सरकार का अनुसरण करें, आवेश में ना आएँ, एकजुटता और "संयमता" के हथियार से देश में छुपे अथवा पडौसी देश की गोद में बैठे देश के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दें!

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क्या इतना आत्मविश्वास कभी देखा है?

दुनिया में आपने बहुत-बहुत बड़े आत्मविश्वासी देखें होंगे, लेकिन मैंने अपने जीवन में किसी में इतना आत्मविश्वास कभी नहीं देखा...

क्या आपने इतना आत्मविश्वास कभी देखा है?

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खतरनाक आयटम!


मम्मी के हाथों कुछ ही देर पहले पिटा बच्चा पिता के आते ही उनसे बोला- 


"डैडी! क्या आप कभी अफ्रिका गए हो?"


 पिता ने फ़ौरन जवाब दिया - 


"नहीं बेटा! आज तक कभी नहीं गया।"

 


बच्चे ने बहुत ही मासूमियत से मालूम किया - 


"तो फिर इतनी खतरनाक आयटम आप कहां से लाए?"



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पति की हाज़िर जवाबी


एक पति पत्नी से बोला - "यदि भविष्य में मुझे कुछ हो जाता है तो क्या तुम दूसरी शादी कर लोगी?"


पत्नी ने कहा - "मैं अपना सारा जीवन अपनी बहन के साथ गुजार दूँगी, लेकिन दूसरी शादी कभी नहीं करूँगी।"

उसने पति से मालूम किया - "अगर मुझे कुछ हो गया तो क्या तुम दूसरी शादी करोगे?"

पति भी हाज़िर जवाबी से बोला - "ऐसा कभी नहीं होगा! तुम फ़िक्र क्यों करती हो? मैं भी तुम्हारी बहन के साथ ही रह लूँगा।"

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सबसे बड़ा सवाल

जो आदमी हमेशा हँसता रहता है 
उसे हसमुख (HUS-MUKH) कहते हैं. 

तो सवाल यह उठता है कि 
जिसका हसना बिलकुल बंद हो जाए 
उसको क्या कहेंगे?


 
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जवाब:

हस-बंद... मतलब अंग्रेजी  में पढ़े तो...


HUS-BAND

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खुशदीप सहगल की बग़ावत

सतीश जी वाले प्रकरण के बाद हंगामा मचा हुआ है. एक तरफ पोल खुलने के कारण सतीश सक्सेना जी की हालत ना हँसते बनती है ना रोते, वहीँ दूसरी तरफ खुशदीप सहगल ने भी गैंग में बग़ावत कर दी है. उनको लगता है कि ज़रूर यह खबर और फोटो द्विवेदी जी या फिर मैंने लीक की हैं. उन्होंने बदला लेने के उद्देश्य से मक्खन परिवार को रॉकेट लोंचर पर चढ़ा कर द्विवेदी जी के यहाँ ब्लास्टिंग कर दी. बकौल सतीश जी मक्खन परिवार को तो मुशर्रफ जैसा शख्स नहीं झेल पाया तो फिर द्विवेदी जी क्या चीज़ हैं. कोर्ट में चाहें वह कितना ही धमाल मचा लें लेकिन यहाँ स्लोग ओवर को झेलना था. पहली बार तो मक्खन परिवार को घर पर देखते ही उनपर बेहोशी छाने लगी, वोह तो अच्छा है बाथरूम करीब ही था! म्म्म्मात्लब बाथरूम करीब होने के कारण श्रीमती द्विवेदी जी जल्दी से पानी का मग भर लाई  और उड़ेल दिया द्विवेदी जी के मुंह पर, तब जाकर तो वह होश में आये.

यह एक ब्लोगर का ही जिगरा था कि पुरे एक दिन झेला उन्होंने मक्खन परिवार को, वर्ना अच्छे-अच्छों को नानी याद आ जाती है. रात को जब दिल्ली यात्रा संस्मरण पोस्ट लिखने बैठे तो अचानक उन्हें मेरी याद आई और पोस्ट ठेलते-ठेलते उन्होंने पूरी प्लानिंग कर ली मक्खन परिवार से छुटकारा पाने की. रात भर सो नहीं पाए और सुबह होते ही मक्खन परिवार को कानूनी बातों में उलझा कर दिल्ली के लिए रवाना कर दिया और जेब में मेरे पते की पर्ची डाल दी. :-(

फिर क्या था, मक्खन परिवार पहुँच गया मेरे द्वारे:

मरता क्या ना करता, "भाआआई" का डर और वह भी खुशदीप भाई जैसे खतरनाक भाआआई का, इसलिए कुछ कह भी नहीं सकता था. खूब धूम-धाम से मालाएं-वालाएं डाल कर स्वागत किया.


जिस स्लोग ओवर नाम के हथियार से मक्खन-ढक्कन-मक्खनी के द्वारा वह पूरे ब्लॉग जगत को फोड़ते आये थे, वाह आज मेरे द्वारे खड़ा था. उस पर प्लस पॉइंट यह कि मक्खन-मक्खनी का सुपुत्र छक्कन भी साथ था. छक्कन कैसा हथियार होगा, जिसे खुशदीप भाई ने आड़े वक़्त के लिए संभाल के लिए रखा था, यह सोच कर ही जान निकल गई.


उनको एक कमरे तक पहुँचाया गया, थोड़ी देर बाद जाकर चेक किया तो वह वहां पर धमाल मचा रहे थे.



उनकी इस हरकत पर मैंने भूख हड़ताल का फैसला कर लिया है, अगर खुशदीप भाई ने इन्हें अपने घर वापस बुलाकर अपनी पोस्टों में नहीं ठेलते हैं तो मैं भी जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर ही बैठा रहूँगा.



रोज़-रोज़ तड़प-तड़प कर मरने से तो अच्छा है कुछ किया जाए...




क्या ख्याल है आपका???





Keywords: protest, slogver, deshnama.com, khushdeep sehgal, makkahan family, dhakkan, dineshrai dwivedi, satish saxena, blog jagat.

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सतीश सक्सेना की धमकी

"सम्मान समारोह में बड़ा खुलासा" 

सतीश सक्सेना सम्मान समारोह में भाग लेने आये 3 ब्लोगर बंधुओं को अपनी कार में घुमा रहे थे, बीच में उन्होंने नुक्कड़ पर  अविनाश वाचस्पति को फोन करके बताया की उनके साथ कुछ लोग हैं, जिनके ठहरने का इंतजाम कनाट पेलेस के पांच सितारा होटल 'दा पार्क' में किया गया है और सारा खर्च अभी तक उन्होंने ही किया है. उनकी मांग थी कि होटल और उनकी कार पर हुआ खर्च अविनाश जी सूद समेत उन्हें दें, लेकिन अविनाश वाचस्पति अड़ गए की ब्लोगर्स बंधुओं को अपने ठहरने का इंतजाम खुद करना चाहिए, वह एक पैसा भी नहीं देंगे. इस बात को लेकर काफी देर तक उन दोनों में बहस होती रही, हालाँकि सतीश सक्सेना ड्राइविंग कर रहे थे. अविनाश जी ने यहाँ तक कह दिया की उनके पास किसी को देने के लिए एक खोटा पैसा भी नहीं है, जिसमें हिम्मत हो ले ले! इस पर श्री सतीश सक्सेना ने कहा कि वह जो पैसों से भरा झोला अपने साथ रखते हैं, समारोह में उनसे वही झोला छीनकर सारी वसूली की जाएगी.

सतीश जी की यह धमकी सुनकर अविनाश जी डर गए, यहाँ तक कि अपना झोला भी लेकर नहीं आये. फिर क्या था, यह सूचना मिलते ही सतीश सक्सेना ने भी समारोह में आने का फैसला बदल डाला. शायद उन्हें लगा होगा कि अविनाश वाचस्पति ने धमकी से डर कर न्यू मीडिया के बीच जाने का फैसला ना कर लिया हो, उन्हें क्या पता कि अविनाश जी ने तो डर के मारे यह बात रविन्द्र प्रभात को भी नहीं बताई थी.


लेकिन न्यू मिडिया के सूत्र यह सब पता लगा चुकें थे, यह सजग प्रहरी सम्मलेन के पीछे के सारे खेल को धीरे-धीरे सबके सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध थे. सबसे पहले तो हम उन तीनो ब्लोगर बंधुओं के चित्र आपको दिखाते हैं.

गौर से देखिये और पहचानिए इन तीनो को, जो सतीश सक्सेना की साजिश में शामिल थे,
इन्ही तीनो के नाम पर वसूली की साजिश का प्लान बनाया गया था.

इन तीनो के साथ मिलकर सतीश सक्सेना नामक ब्लोगर ने होटल के इसी कमरे में इस साज़िश का ताना-बाना बुना था

देखिये प्लान सुनकर कितने खुश नज़र आ रहे हैं यह लोग

गंभीर मंत्रणा चल रही है


अपने साथ समर्थन जुटाने के लिए यह लोग छतीसगढ़ बिग्रेड से भी गुप-चुप मंत्रणा करने पहुँच गए


सबूत के लिए इस मंत्रणा की ख़ुफ़िया कैमरे से ली गई तस्वीर देखिये


सुनीता शानू जी के ऊपर खाने-पीने का भार सौंपा गया था


अविनाश वाचस्पति, डर के मारे मंच से नीचे नहीं उतर रहे थे, इसलिए सतीश सक्सेना का एक साथी तो वसूली के लिए स्टेज पर ही जा धमका.


लेकिन अविनाश वाचस्पति उसे देखते ही उसके इरादों को भांप गए थे, इसलिए उन्होंने तुरंत ही उसकी मुलाक़ात मंच पर बैठे 'बड़े लोगो' से करा दी, जिससे कि वह उन लोगो के सामने कुछ बोल ना सके. उन लोगो ने समझा यह भी कोई साहित्यकार या उपलब्धि प्राप्त ब्लोगर है :-) तो उसे भी झट से ट्रॉफी  और सर्टिफिकेट देकर मंच से ज़बरदस्ती नीचे उतार दिया गया.



सतीश जी का यह गुर्गा, अजीब सी स्थिति में फंस गया था, इसलिए सिवाए मुस्काराने के कुछ भी नहीं कर सका, सोच रहा है जान बची सो लाखो पाए!


तो आपने देखा, पुराने खिलाड़ी अविनाश वाचस्पति ने किस तरह सतीश सक्सेना के हमले को झेला, ना सिर्फ झेला बल्कि अपनी चतुराई की बदौलत उसको बेकार भी कर दिया.


(हमने सतीश सक्सेना और उनके गुर्गों को बेनकाब कर दिया है, आप लोगो को यह ख़ुफ़िया जानकारी कैसी लगी, हमें लिख भेजिए!)

Keywords: New Don, Satish Saxena, Khushdeep Sehgal, Dineshrai Dwivedi, new media, blogging, parikalpna award, nukkadh.com, chattisgarh bloggers, humour.

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कल का मैन ऑफ़ दा मैच!!!

हुरररररररररे!!!!!! हम जीत गए!!!!!!!!!


बहुत-बहुत मुबारक हो!!! सबको मुबारक हो!!! पाकिस्तान को भी मुबारक हो!!! :-) :-) :-) :-) :-)

खुशदीप भाई कह रहे हैं, हर हिन्दुस्तानी की बात!....... हटो, हटो, ऐ श्रीलंका वालों, वर्ल्ड कप अब हमारा है...

धूम-धूम धडाम-धडाम धम्म-धम्म टूंश, फूंश, भड-भड-भड-भड... धिनशा-धिनशा.... फटाक-फटाक... धडाम-धडाम... ठाँ-ठाँ-ठाँ-ठाँ....


[यह वोह बम्ब-पठाखे हैं जो रात जलाएं हैं :-) :-) :-) ]


 
चलिए लगे हाथ आपको यह भी बता देते हैं की कल का मैच किसने जिताया... नीचे उसका फोटो लगा रहा हूँ... पहचानिए????
 
 
 
 
पहचाना क्या???? अरे और कौन होगा? वही ना, जिसका टोटका कल चला है!!!!!!!!!!

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टोटका: आज पाकिस्तानी टीम जीतेगी!

लोग भारतीय टीम के लिए अजीब-अजीब टोटके कर रहे हैं, चलिए एक टोटका अपनी तरफ से भी :-) ... वैसे इसे आप हाजमा ठीक करने की दवा भी कह सकते हैं, 3-4 दिन से हमारे खबरिया टी. वी.  चैनल्स ने जंग छेड़ी हुई है. अच्छी-अच्छी  बातें कुछ ज़्यादा ही कही जा रही हैं और आपको तो पता है ज्यादा अच्छा हज़म करने में थोड़ी परेशानी तो होती ही है. इसलिए सोचा मैच के रिज़ल्ट के पहले हाजमा ठीक कर लिया जाए.

आज हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट विश्वकप का सेमी-फाइनल मैच है (अबे यह क्या बता रहे हो, बच्चे-बच्चे को पता है यार. वैसे इस मैच से एक बात और पता चल गई की अपने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कोई गिलानी जी हैं). अगर दोनों टीमों की तुलना की जाए तो एक तरफ हमारी टीम अंतराष्ट्रीय रैंकिंग पर नंबर 6 पर आती है और पाकिस्तान की टीम नंबर 2 पर. इससे पता चलता है कि हमारी टीम कितनी कमज़ोर है इस मुकाबले में. जहाँ पाकिस्तान की बल्लेबाजी उनकी ताकत है तो वहीँ हमारी गेंदबाजी कुछ मज़बूत दिखाई दे रही है. एक तरफ हमारी टीम के कमज़ोर बल्लेबाज़ सचिन, सहवाग और युवराज पहले ही खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं, लेकिन हमारे पास कप्तान धोनी और पठान जैसे धुरंधर बल्लेबाज़ भी हैं, जो कि इस टूर्नामेंट में लगातार अच्छी फॉर्म दिखा चुके हैं. अगर गेंदबाजी का विश्लेषण करें तो ज़हीर और अश्विन ने ज़रूर पिछले कुछ मैचों में निराश किया है, लेकिन अच्छी बात यह है कि विश्व के सबसे सफल तेज़ गेंदबाज़ में शुमार हमारे मुनाफ, नेहरा और फिरकी गेंदबाज़ हरभजन बहुत अच्छी फॉर्म में हैं. फील्डिंग के क्षेत्र में भी हमारे खिलाड़ियों ने पिछले मैचों में बहुत निराश किया है.

दूसरी तरफ पाकिस्तान बल्लेबाज़ी विश्व में नंबर एक  पर मानी जाती है, किस किस का नाम लूं, सारे के सारे एक से एक बढ़कर हैं (अबे नाम नहीं याद आ रहे हैं तो बहाना क्यों बना रहा है) यहाँ तक कि विश्व कप में भी धमाल दिखा रही है. मुझे लगता है कि शाहिद अफरीदी, शोएब अख्तर और उमर गुल जैसे कमज़ोर गेंदबाजों की कमियों को उनकी बल्लेबाजी पूरा कर लेगी. वैसे भी पाकिस्तानी टीम फील्डिंग के क्षेत्र में पुरे विश्व में मशहूर है, फिर उनके देश के राष्ट्रपति भी हौसला अफजाई के लिए आ रहे हैं. हमारे प्रधानमंत्री ने पहले ही टीम को कह दिया होगा कि आपको पाकिस्तान से हमारी गहरी दोस्ती की कसम आज उनकी टीम को निराश मत करना. वैसे भी दोस्ती की कीमत पर विश्वकप ले भी लिया तो क्या फायदा? हमें अपनी महानता का परिचय देते हुए अपने देश के मेहमानों का सम्मान करना चाहिए...

समाप्त...


वैसे पोस्ट अब समाप्त हो चुकी है,  अब आप मुझे जितना चाहे 'अपशब्द' कह सकते हैं. आपका हक बनता है भाई!






keywords: india, pakistan, worldcup cricket maitch, semi final, critics, humour

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मेरी नए साल की लोकल पार्टी का फोटो

हमारे मौहल्ले में  नए साल पर हमने जम कर हंगामा किया, लोग भी भौचक्के थे. एक कसर रह गई, कैमरा कोई भी नहीं लाया था... खैर! पडौस के एक लड़के से कैमरा माँगा और एक फोटो खिंची... आप भी देखिये कैसी आई है?

पूरा देखने के लिए फोटो पर क्लिक करें!!!

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आम है क्या?


एक तोता एक दूकानदार से मालूम करता है: लाला जी आम है क्या?
दुकानदार: नहीं! हम आम नहीं बेचते

अगले दिन फिर तोता मालूम करता है: लाला जी आम है क्या?
दुकानदार: अरे बोला था ना... हम आम नहीं बेचते

तीसरे दिन फिर तोता मालूम करता है: लाला जी आम है क्या?
दुकानदार खुन्नस में आकर कहता है: अगर अब बोला तो हथौड़ा मारूंगा!

चौथे दिन तोता मालूम करता है: लाला जी हथौड़ा है क्या?
दुकानदार: नहीं!
तोता: तो आम है क्या???
लाला जी हैरान...परेशान!!!

पांचवे दिन तोता फिर आ धमकता है: लाला जी आम है क्या?
लाला जी उसके मुंह पर हथौड़ा दे मारते हैं, तोते के दांत टूट कर बिखर जाते हैं!!!

छठे दिन तोता फिर से आ धमकता है
लाला जी तोते को बिना दांत के देखकर मुस्कराते हैं.... 

तोता धीरे से कहता है: लाला जी! 



आम का जूस है क्या???

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ओबामा पर चढ़ा भारतीय रंग

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत आए तो भारतीय रंग में पूरी तरह रम गए थे, आप भी देखिए सचित्र वर्णन...


कलाम साहब से कलाम किया और बस उन्ही के हो लिए.. 


मैडम के जादू से कौन बच पाया है?


लगता है इनको 2G घोटाले के पूरी खबर थी इसलिए पहले सोनिया G और अब राहुल G



मुंबई आना है तो ठाकरे साहब को कैसे ठुकराया जा सकता है?


नोर्थ, साउथ, इस्ट और वेस्ट ---------- इंडिया इज द बेस्ट!


लालू जी से चारा और रेल मेनेजमेंट के गुर जो सीखने थे...


ममता दी के गुस्से से डर गए क्या?


अब माया से कौन दूर भाग सकता है भला?




और अंत में..............  
 एकदम असली इंडियन:

"सरदार ओबामा सिंह"




Keywords : obama in india, avatar as indian politicians, cartoons, critics

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रोंग नंबर

एक व्यक्ति अपने कार्यालय से घर पर फ़ोन करता है तो एक अजीब महिला जवाब देती है:


व्यक्ति: आप कौन है?
महिला: नौकरानी
व्यक्ति: लेकिन हमारे घर पर तो कोई नौकरानी नहीं है?
महिला: मुझे आज सुबह ही घर की मालिकिन ने रखा है.
व्यक्ति: खैर! मैं उसका पति हूँ, क्या वह वहां पर है?
महिला: उम्म्म्म.... परर्रर.... वह तो ऊपर... अपने बेडरूम में किसी और व्यक्ति के साथ है, उनकी आवाजों से तो मुझे लगा कि वह उसका पति है.

इतना सुनकर व्यक्ति को गुस्से में लाल-पीला हो जाता है.

व्यक्ति: सुनो! क्या तुम 50,000 रूपये कमाना चाहती हो?
महिला: (रोमांचित होते हुए) मुझे इसके लिए क्या करना होगा?
व्यक्ति: मैं चाहता हूँ, कि अलमारी में रखी मेरी गन उठाओ और मेरी पत्नी और उस घटिया आदमी को गोली मार दो.

वह महिला फ़ोन नीचे लटका कर चली जाती है... व्यक्ति उसके पैरों की आवाज़ और दो धमाकों की आवाज़ सुनता है. महिला वापिस आकर फ़ोन पर मालूम करती है:

महिला: मृत शरीरों के साथ क्या करना है?
व्यक्ति: इनको स्विमिंग पुल में फेंक दो!
महिला: क्या? लेकिन यहाँ तो कोई स्विमिंग पुल नहीं नहीं!

बहुत देर तक चुप रहने के बाद
व्यक्ति: उह....मम.... क्या यह 25xx43xx न. है?
महिला: नहीं!
व्यक्ति: ओह्ह.... माफ़ करना.... रोंग नंबर...


keywords: critics, Wrong Number

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कैसी कैसी फितरत!

इस धरती पर हर एक की अपनी अलग फितरत होती है, ज़रा देखते हैं कि किसकी कैसी फितरत है?



लड़के (नर्क में): यार यमराज की लड़की क्या माल है बाप! चलती है तो लगता है फूल गिर रहे हैं। नर्क के सारे लड़के उसके ही पीछे है, एक बार बात करने का मौका मिल जाए!
(संदेशः छिछौरे नर्क में भी छिछौरे ही रहते हैं!)



लड़कियां (स्वर्ग में): इस अप्सरा की नेल पाॅलिश क्या टैकी है यार और वोह ड्रेस देखी उसकी! यह इतनी पतली कैसे है? मैं तो डाईटिंग कर-कर के थक गई, फिर भी वेट (वज़न) कम ही नहीं होता।
(संदेशः यहां भी दूसरी से जलन)


अधेड़ उम्र के साथी (नर्क में): अरे भाई, कल पड़ोस के आग के पार्क में सुबह-सुबह जौगिंग कर रहा था, (बाई आंख मारते हुए) वोह लल्लन की छोरी आग में भी गुलज़ार लग रही थी।
दूसराः तो कुछ बात-वात की?
पहलाः अरे मिंया अब इतनी उम्र कहाँ कि उस नवयौवना का पीछे कर पाते, आंखो से ही दूर तक छोड़ आए।
(संदेशः इस उम्र में भी....!)





बहु (स्वर्ग में): हे प्रभु! मेरी सास मुझे दिन-रात सताती है, उसे यहां क्यों रखा है? काश! यह नर्क में चली जाए, हम साथ-साथ नहीं रह सकते हैं।
(संदेशः हमेंशा ही अलग रहने की सोच, चाहे सास जाए भाड मे!)

स्वर्ग में है इसलिए इसकी मनोकामना क़ुबूल हो गई. उसकी विश कुबूल होने के बाद।
सास (नर्क में): प्रभु! नर्क में बहुत तकलीफ है, मेरी बहु अगर मेरी सेवा करती तो अच्छा था। मेरा उसके बिना दिल नहीं लगता है, उसे भी मेरे पास भेज दीजिए।
(संदेशः मतलब अपना भला हो ना हो, लेकिन बहु का बुरा अवश्य होना चाहिए।)


बाप और बेटा (धरती पर): प्रभु हमें कहां छोड़ दिया? वोह दोनों चाहे जैसी भी थी, लेकिन............. नौटंकी के बिना अब तो खाना भी हज़म नहीं होता है! प्लीज़ हमें भी उनके पास भेज दीजिये!
===> यह बेचारे वोह प्राणी है कि प्रभु ने भी सोचा कि इनका अकेला रहना ही बेहतर है। लेकिन अकेले रहना इनके बस का कहाँ है???
(संदेशः यह वोह खरबूज़े हैं जिन्हें हर हाल में कटना ही कटना है! मतलब एक का पक्ष लिया तो दूसरी नाराज़)




बाप बेटे से (परलोक में): बेटा यह चाहे परलोक ही क्यों ना हो लेकिन महिलाएँ, यहाँ भी महिलाएँ ही हैं। माँ और पत्नी में से कभी किसी एक का पक्ष मत लेना, मगर किसी एक के सामने हमेशा उसका ही पक्ष लेना! और हाँ कभी भूल कर भी पत्नी के सामने अप्सराओं को मत घूरना, वर्ना जीते जी धरती सिधार जाओगे!





वैसे मर्द, मर्द ही होते हैं, यकीन नहीं आता है तो यह देखो.........
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Keywords: Hindi Critics, फितरत

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