Showing posts with label रिश्ते. Show all posts
Showing posts with label रिश्ते. Show all posts

क्या कुछ पलों का प्यार किसी की पूरी जिंदगी और भरोसे से ज्यादा कीमती हो सकता है?

ये हैं विनोद और उनकी पत्नी निधि। कॉलोनी में लोग इन दोनों को एक आदर्श couple माना करते थे। औरतें अक्सर कहती थीं, “पति हो तो विनोद जैसा…” और मर्द कहते थे, “बीवी हो तो निधि जैसी…” 💖 


विनोद अपनी पत्नी को सिर्फ पत्नी नहीं, बल्कि अपना सुकून मानते थे। उनके लिए निधि ही उनकी पूरी दुनिया थी। वहीं निधि भी एक जिम्मेदार पत्नी, मां और बहू थी। घर हमेशा खुशियों से भरा रहता था और देखने वालों को लगता था कि इस परिवार के पास हर खुशी मौजूद है। लेकिन कहते हैं ना… कई बार सबसे खूबसूरत दिखने वाले रिश्तों के पीछे सबसे खतरनाक राज छुपे होते हैं ⚠️


हरियाणा के Panipat में रहने वाले विनोद बराड़ा एक computer training center चलाते थे। वो सिर्फ पैसे कमाने वाले इंसान नहीं थे, बल्कि गरीब बच्चों को free में training भी देते थे और जरूरतमंदों के लिए भंडारे भी करवाते थे, इसी वजह से इलाके में उनकी बहुत इज्जत थी। लोग उन्हें नेक दिल इंसान मानते थे। 


लेकिन 21 October 2021 का दिन उनकी जिंदगी में ऐसा तूफान लेकर आया जिसने सब कुछ बदल दिया। विनोद अपने center के बाहर बैठे थे, तभी एक तेज रफ्तार truck ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी! 😨


हादसा इतना भयानक था कि लोगों को लगा शायद वो बच नहीं पाएंगे। घंटों operation चला, दोनों पैरों की हड्डियाँ टूट चुकी थीं। कुछ दिनों बाद doctors ने उन्हें discharge तो कर दिया, लेकिन महीनों तक bed rest बताया गया।


घर आने के बाद निधि उनका खूब ख्याल रखती थी। पूरा परिवार यही उम्मीद कर रहा था कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। उधर truck driver दीपक उर्फ Dev बार-बार यही कह रहा था कि ये accident जानबूझकर नहीं हुआ, truck का brake fail हो गया था। Police ने उसे arrest किया, लेकिन कुछ ही समय में उसे bail मिल गई। फिर आया 15 December 2021… वो दिन जिसने बराड़ा परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर दिया! 😢


उस दिन निधि kitchen में खाना बना रही थी और विनोद अपने कमरे में आराम कर रहे थे। तभी main gate खुला होने का फायदा उठाकर एक आदमी हाथ में gun लेकर घर के अंदर घुस गया। वो सीधे विनोद के कमरे में गया, अंदर से दरवाजा बंद किया और ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। 


गोलियों की आवाज सुनकर निधि भागती हुई दरवाजे तक पहुँची, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था। वो घबराकर बाहर मोहल्ले वालों को बुलाने लगी। लोग दौड़कर अंदर आए और दरवाजा तोड़ने की कोशिश करने लगे। तभी वो आदमी gun लहराते हुए बाहर निकला, लेकिन गुस्साए लोगों ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। Police तुरंत पहुँची और विनोद को hospital ले जाया गया, लेकिन doctors ने उन्हें मृत घोषित कर दिया! 💔


Police investigation में पता चला कि गोली चलाने वाला truck driver दीपक ही था। 


पूछताछ में उसने कहा कि विनोद केस वापस नहीं ले रहे थे, इसलिए गुस्से में उसने ये सब कर दिया। लेकिन विनोद के माता-पिता को उसकी बात पर भरोसा नहीं हुआ। उन्हें लग रहा था कि इस कहानी में कुछ छुपा हुआ है। फिर साल 2024 में इस case की जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारी Ajit Singh Shekhawat के हाथ में आई। तभी विनोद के छोटे भाई प्रमोद का Australia से message आया — “मुझे लगता है दीपक अकेला नहीं है… घर का कोई अपना भी इसमें शामिल है।”


इसके बाद Police ने secret investigation शुरू की। Deepak की call details और bank accounts खंगाले गए तो बार-बार एक ही नाम सामने आने लगा — Sumit। 


लगातार calls, पैसों का लेन-देन… सब कुछ उसी तक जाकर रुक रहा था। फिर police ने Sumit की पूरी details निकालीं और उसके बाद जो नाम सामने आया, उसे सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई, वो नाम था — निधि बराड़ा… यानी विनोद की अपनी पत्नी।


जब police ने निधि को बुलाकर CCTV footage, call records और bank details सामने रखीं, तो आखिरकार वो टूट गई और उसने सारा सच कबूल कर लिया। 


निधि ने बताया कि 2021 में उसने gym join किया था, जहाँ उसकी मुलाकात trainer Sumit से हुई। धीरे-धीरे दोनों करीब आए और फिर रिश्ता प्यार में बदल गया। जब विनोद को इस बारे में पता चला, तो घर में झगड़े शुरू हो गए। इसके बाद निधि और Sumit ने फैसला किया कि अगर उन्हें साथ रहना है, तो विनोद को रास्ते से हटाना होगा। सबसे पहले truck accident करवाया गया, लेकिन विनोद बच गए। फिर दो महीने बाद उसी दीपक से गोली चलवाकर उनकी हत्या करवा दी गई! 😢


सोचिए… जिस इंसान ने अपनी पत्नी को अपनी दुनिया माना, जिसे वो अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता था, उसी ने कुछ महीनों के रिश्ते के लिए उसे हमेशा के लिए मौत के हवाले कर दिया। आज निधि और Sumit दोनों जेल में हैं। लेकिन इस कहानी ने एक सवाल सबके दिल में छोड़ दिया — क्या कुछ पलों का प्यार किसी की पूरी जिंदगी और भरोसे से ज्यादा कीमती हो सकता है? 💭


#PanipatMurder #NidhiBarada #JusticeForVinod

Read More...

मुस्लिम पिता ने हिंदू बेटी का कन्यादान किया… शादी का कार्ड देख लोग रो पड़े 😢❤️


सोचिए… आज के दौर में जहाँ लोग नाम और धर्म देखकर रिश्ते तोड़ देते हैं, वहीं एक शख़्स ने इंसानियत को सबसे ऊपर रख दिया… ❤️


मध्य प्रदेश के राजगढ़ की ये कहानी है…

एक मुस्लिम पिता — अब्दुल्ला हक खान

और उनकी बेटी — नंदिनी


ये रिश्ता खून का नहीं था… लेकिन मोहब्बत इतनी सच्ची थी कि हर रिश्ता फीका पड़ जाए।


नंदिनी बचपन में ही अपने माँ-बाप को खो बैठी थी… ज़िंदगी ने सब कुछ छीन लिया था… 😔


लेकिन उसी वक़्त अब्दुल्ला खान ने उसे सिर्फ़ सहारा नहीं दिया, बल्कि अपनी सगी बेटी की तरह सीने से लगा लिया।  कभी उसकी पहचान नहीं छीनी गई…


उसे उसके अपने संस्कारों के साथ बड़ा किया गया, पढ़ाया-लिखाया और आज…

👉 वही पिता अपनी बेटी का हिंदू रीति-रिवाज़ से कन्यादान कर रहे हैं 💔❤️


शादी का कार्ड जब लोगों के हाथ में आया… तो उसमें लिखा था:

👉 बेटी – नंदिनी

👉 पिता – अब्दुल्ला हक खान


बस… यहीं से हर किसी की आँखें नम हो गईं… 😢

क्योंकि ये सिर्फ़ कार्ड नहीं था, ये इंसानियत का पैग़ाम था।  

आज जब दुनिया धर्म के नाम पर बंट रही है, तब ये कहानी हमें याद दिलाती है:

👉 मोहब्बत का कोई मज़हब नहीं होता

👉 रिश्ते खून से नहीं… दिल से बनते हैं


काश… हम सब भी थोड़ा-सा इंसान बन जाएं…

तो शायद ये दुनिया और भी खूबसूरत हो जाए… 🤍✨

Read More...

'बेहया' औरतों का रेप करना मर्दों का हक़ है?

निर्भया केस में रेपिस्टों के वकील ने अपने घटिया बयान में क्या गलती की है? वह तो उसी सोच को ज़ाहिर कर रहा है जो इस पुरुष प्रधान समाज ने बनाई है। वह ही क्या बल्कि अधिकतर पुरुष सोचते है कि औरतें मर्दों की ग़ुलाम हैं। 

उनके हिसाब से बलात्कार के केस में गुनाहगार लड़की ही होती है। वह अकेली बाहर निकलेगी तो उस 'बेहया' की बोटियाँ नोचना मर्दों का हक़ बनता है। समाज चाहता है कि औरत पहले पति की गुलाम बने और उसके बाद बेटों की। और अगर पति या बेटे ना हों तो समाज के ठेकेदारों या फिर जिस्म के दलालों की ग़ुलामी करें, नहीं तो उन्हें पेट्रोल छिड़क कर जला दिया जाएगा या फिर तेज़ाब से झुलसा दिया जाएगा।

यक़ीन मानिये निर्भय केस पर भी अगर मिडिया/सोशल मिडिया और सड़क पर नौजवानों  के द्वारा आन्दोलन नहीं चलाया गया होता तो इस केस का हाल भी अन्य लंबित केसों जैसा ही होता। 

जिन लोगो को उसके बयान पर शर्म आ रही है, तो पहले वोह अपने समाज की सोच बदलने की चिंता करें, क्योंकि यह हमारे समाज की दबी हुई या छुपी हुई आवाज़ है।




Read More...

उनका अहसान फ़र्ज़, हमारा फ़र्ज़ अहसान

समाज में महिलाओं के पुरुषों पर अहसान को उनका फ़र्ज़ (ड्यूटी) और अपने फ़र्ज़ पूरे करने को उनपर एहसान बताया जाता है।

पत्नी का पति के लिए खाना बनाना, घर का ख्याल रखना, बच्चों की परवरिश करना इस्लाम में फ़र्ज़ नहीं है, बल्कि पति पर एहसान है (अगर वोह करना चाहे तो) । अगर पत्नी बच्चे को दूध ना पिलाना चाहे तो दूध पिलाने वाली का इंतजाम करना पति के ऊपर फ़र्ज़ है। और एहसान का बदला एहसान से या फिर कम-अज़-कम हुस्न-सलूक होना चाहिए। लेकिन इसको पत्नी की ड्यूटी बना दिया गया, जिससे कि वोह घर की चार-दिवारी में टिकी रहे।

यहाँ तक कि माता-पिता की देखभाल करना, उनके खाने-पीने का इंतजाम करना पति पर  फ़र्ज़ बनाया गया है, लेकिन आज उसे पत्नी का फ़र्ज़ बना दिया गया है। ऊपर से किसी भी महिला के अपने माता-पिता के लिए जो फ़र्ज़ हैं उन्हें गुनाह समझा जाने लगा है। कोई महिला अगर अपने माता-पिता की देखभाल करती है, आर्थिक मदद करती है तो उसे बुरा समझा जाता है। अपनी मर्जी चलाई जा सकें, इसलिए  अधर्म को धर्म का जामा पहनाने की कोशिश की जाती है।

अगर समाज में सभी रिश्ते एक-दूसरे के हक को समझे, दूसरों के अहसान को अहमियत दें रिश्तों में कडवाहट नहीं बल्कि मिठास जागेगी। बहु को अहसास होना चाहिए की उसके सास-ससुर के उस पर कितने अहसान हैं, वहीँ सास-ससुर को अपनी बहु के एहसानों पर मुहब्बत की नज़र रखनी चहिये।  जैसे पत्नी पति के रिश्तों को अहमियत देती है, ठीक उसी तरह पति को भी अपनी पत्नी के रिश्तों को उतनी ही अहमियत देनी चहिये।

एक दूसरे पर अहसान दर-असल एक दूसरे से मुहब्बत की अलामत है।

(मेरे द्वारा की गई टिपण्णी का सार)





Read More...

मेरी बिटिया 'ऐना' का जन्म दिन



आज मेरी प्यारी सी बेटी 'ऐना' का जन्म दिन है, माशाल्लाह आज वोह पूरे सात वर्ष की हो गयी है.

और हाँ उसने एक छोटी सी कविता लिखी है, जिसे मैंने उसी समय मोबाइल पर टाइप कर लिया था। आज उसने उस कविता को अपने ब्लॉग पर भी शेयर किया है. आप उसके ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं.

फूलों की तरह महको 
चिड़िया की तरह चहको।




Read More...

मुस्लिम समाज में तलाक़ का प्रावधान

सबसे पहले तो हमें यह पता होना चाहिए कि इस्लाम में विवाह एक कोंट्रेक्ट मैरिज होती है जिसमें क़ाज़ी, वकील तथा 2 गवाहों के सामने कुबूल कर लेने से निकाह हो जाता है तथा विशेष परिस्थितिओं में विवाह को 'तलाक' अथवा 'खुला' के द्वारा विच्छेद किया जा सकता है। मुस्लिम विवाह में गवाह, वकील तथा क़ाज़ी केवल इसलिए होते हैं जिससे कि कोई भी पक्ष विवाह से मुकर ना जाए।

ठीक इसी तरह जब यह एहसास हो जाए कि अब साथ रहना नामुमकिन है और ज़िन्दगी की गाडी को आगे बढाने के लिए अलग होना ही एकमात्र तरीका बचा है, तब ऐसे हालात के लिए तलाक़ का प्रावधान है।

तलाक़ का इस्लामिक तरीका यह है कि जब यह अहसास हो कि जीवन की गाडी को साथ-साथ चलाया नहीं जा सकता है, तब क़ाज़ी मामले की जाँच करके दोनों पक्षों को कुछ दिन और साथ गुज़ारने की सलाह दे सकता है अथवा गवाहों के सामने पहली तलाक़ दे दी जाती है, उसके बाद दोनों को 30 दिन (माहवारी की समयसीमा) तक अच्छी तरह से साथ रहने के लिए कहा जाता है। अब अगर उसके बाद भी उन्हें लगता है कि साथ रहना मुश्किल है तो फिर दूसरी बार गवाहों के सामने "तलाक़" कहा जाता है, इस तरह दो "तलाक" हो जाती हैं और फिर से 30 दिन तक साथ रहा जाता है। अगर फिर भी लगता है कि साथ नहीं रहा जा सकता है तब जाकर तीसरी बार तलाक़ दी जाती है और इस तरह तलाक़ मुक़म्मल होती है।

इसके अलावा 1 तलाक़ देने के बाद तीन महीने तक भी इंतज़ार किया जा सकता है और तीन महीने पूरे होने से पहले साथ रहने या नहीं रहने का फैसला किया जाता है, अगर साथ नहीं रहना है तो तलाक़ हो जाती है। इस हालत में अगर कुछ दिनों या महीनों के बाद दोनों को अगर लगता है कि तलाक़ देकर गलती की है तो दुबारा निकाह किया जा सकता है, पर इस तरीके से भी अलग-अलग बार तीन बार तलाक़ देने के बाद फिर से शादी का हक़ ख़त्म हो जाता है।

इसमें सुन्नी मुस्लिम समाज का 'हनफी', 'शाफ़ई' तथा 'मालिकी' मसलक में एक ही समय में "तीन तलाक़" को भी सही माना जाता हैं, हालाँकि वह भी इस तरीके को अच्छा तरीका नहीं मानते। अन्य मुस्लिम उलेमा एक समय में तीन तलाक़ दिए जाने को "तलाक़" नहीं मानते हैं और कई मुस्लिम देशों में इस तरह से तलाक देने पर व्यक्ति के विरुद्ध सज़ा का प्रावधान है।



महिलाओं को तलाक़ का हक

यह कहना गलत है कि महिलाओं को तलाक़ का हक नहीं है। अगर किसी महिला को पति पसंद नहीं है या फिर वह शराबी, जुआरी, नामर्द, मार-पीट करने वाला, बुरी आदतों या स्वाभाव वाला या किसी ऐसी सामाजिक बुराई में लिप्त है जो कि समाज में लज्जा का कारण हो तो उसे सम्बन्ध विच्छेद का हक है। इसके लिए उसे भी क़ाज़ी के पास जाना होता है। महिला के आरोप सही पाए जाने की स्थिति में विवाह विच्छेद का अधिकार मिल जाता है, जिसको 'खुला' कहा जाता है।

इस विषय में कुछ लोगो का यह कहना है कि जब विवाह पति-पत्नी की मर्ज़ी से होता है तो तलाक़ किसी एक की मर्ज़ी से कैसे हो सकता है। मेरे विचार से ऐसा कहना व्यवहारिक नहीं है, सम्बन्ध हमेशा दो लोगो की मर्ज़ी से ही बनते हैं परन्तु किसी एक की भी मर्ज़ी ना होने से सम्बन्ध समाप्त हो सकते हैं। ज़रा सोचिये अगर किसी महिला का पति उस पर ज्यादतियां करता है, यातनाएं देता है और तलाक़ देने के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं है तो क्या ऐसे में बिना उसकी मर्जी के तलाक़ के प्रावधान का ना होना जायज़ कहलाया जा सकता है?

एक पुरुष और महिला के दिलों का मिलना और साथ-साथ सामाजिक बंधन में बंध कर रहना विवाह है तो रिश्तों में तनाव या अन्य किसी कारण से साथ-साथ ना रह पाने की स्थिति का नाम 'तलाक़' है।



[इस लेख की अगली कड़ी "हलाला" के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें]

क्या 'हलाला' शरिया कानून का हिस्सा है?






keyword: talaq, talak, talaaq, talaak, divorce in muslims

Read More...

अलविदा प्यारी बहन तब्बू, बहुत याद आओगी...

पिछले कुछ दिनों से व्यस्तता बहुत ज्यादा बढ़ी हुई थी, दीपावली के चलते दफ्तर में काम बहुत अधिक था, ऊपर से एम.बी.ए. की परीक्षा चल रही थी। इधर हमारीवाणी के अपने सर्वर पर स्थानांतरण के कारण वहां पर भी टेक्नीकल काम करने थे। लेकिन ना केवल मुझे बल्कि पूरे घर को चिंता थी मेरी छोटी मामाज़ाद बहन 'इरम' की शादी की तैयारियों की, जो कि 20 नवम्बर को तय हुई थी। सारा घर खुशियों से भरा हुआ था और तैयारियों में व्यस्त था, लेकिन मेरी परेशानी यह थी कि उससे केवल दो दिन पहले मेरा एम.बी.ए. का इम्तहान था।

बात 8 नवम्बर की है, शाम को दफ्तर से आते ही मैं पढने की तैयारियों में जुट रहा था, तभी खबर मिली की मेरी प्यारी लाडली बहन 'तबस्सुम' अचानक इस दुनिया से चली गयी। 3 महीने पहले पीलिया हुआ था, ईद से अगले दिन अचानक तबियत खराब हुई, गाँव में चिकित्सा सुविधाओं के अभाव के कारण शहर ले जाया गया, लेकिन उसकी सांसे रास्ते में ही जवाब दे गयी। उस वक़्त का मंज़र बयान करना नामुमकिन है। 'तबस्सुम' 'इरम' से छोटी थी और मामा साहब की जान थी। वह तबस्सुम को अपना बेटा कहते थे। भाई-बहनों की पढाई से लेकर घर तथा खेती का हिसाब-किताब तक वही संभालती थी।

बड़ी बहन 'इरम' की शादी की सारी की सारी तैयारी तबस्सुम ने खुद ही की थी। हर एक छोटी से छोटी चीज़ वोह खुद ही बड़ी हसरतों से खरीदकर लाई थी और खुद बड़ी बहन की विदाई से पहले ही विदा हो गयी। कहाँ घर में बड़ी बहन के ससुराल जाने की तैयारी चल रही थी और कहाँ हमें उसके 10-12 दिन पहले ही छोटी को विदा करना पड़ा और वह भी हमेशा के लिए...! 

शादी की सारी तैयारी पूरी हो चुकी थी, सारे कार्ड बांटे जा चुके थे,  इसलिए तय किया गया कि 'शादी को तय समय के अनुसार ही किया जाए, जो कि 20 तारिख को अल्हम्दुलिल्लाह मुक़म्मल हो गयी।

तबस्सुम और इरम दोनों ही का बचपन हमारे घर में गुज़रा है इसलिए खासतौर पर इन दोनों से ही जुड़ाव बहुत अधिक रहा, तबस्सुम को मैं प्यार से 'तब्बू' कहा करता था। तब्बू पढने लिखने में बहुत तेज़ थी, बिजनौर से एल.एल.बी की पढाई कर रही थी और बड़ी होकर मजिस्ट्रेट बनना चाहती थी। उसको चित्रकारी के साथ-साथ ना'त, हमद, नज़्म इत्यादि पढने का बहुत शौक था। नीचे उसी की कुछ दिन पहले ही पढ़ी हुई एक नज़्म का लिंक दे रहा हूँ, इस नज़्म को पढ़ते समय जब तब्बू 'जब मेरी रूह निकलेगी, रोएंगे घर वाले' पर पहुंची तो उसका गला भर आया था, जैसे उसे जल्द आने वाले इस मंज़र का इल्म हो गया हो...!!! 

Read More...
 
Copyright (c) 2010. प्रेमरस All Rights Reserved.