कहते हैं ना… अगर आप दुनिया में कुछ बदलना चाहते हैं, तो किसी और के इंतज़ार में मत बैठिए… ख़ुद पहल कीजिए। फिर एक दिन दुनिया आपको सलाम करने के लिए मजबूर हो जाएगी। ❤️
मध्य प्रदेश के ब्यावरा के 20 वर्षीय सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, ने शायद इसी बात को सच कर दिखाया है।
अजनार नदी प्लास्टिक, कचरे और गंदगी से बुरी तरह जूझ रही थी। बिट्टू ने शिकायत करने के बजाय ख़ुद नदी में उतरकर सफाई शुरू कर दी। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने जनवरी 2026 से यह अभियान शुरू किया और कई महीनों तक अपने स्तर पर नदी से कचरा निकालते रहे।
पहले लोगों ने उनके काम को सोशल मीडिया पर दिखाने के लिए आलोचना भी की… लेकिन शायद उन्हें फर्क नहीं पड़ा।
और फिर वही सोशल मीडिया उनके काम को दुनिया तक ले गया।
मार्च में उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी बिट्टू के काम की तारीफ़ की थी।
लेकिन अब जो हुआ, वो वाकई कमाल है…
‘द ओशन क्लीनअप’ के संस्थापक और CEO बोयान स्लैट ने बिट्टू के काम पर प्रतिक्रिया देते हुए सीधे लिखा—
“Come work for us.”
यानी जिस लड़के ने अपने शहर की नदी साफ करने से शुरुआत की, उसे अब दुनिया की सबसे चर्चित समुद्री प्लास्टिक सफाई मुहिम में काम करने का मौका मिल सकता है।
सोचिए…
एक तरफ़ हम अक्सर कहते हैं कि सरकार कुछ नहीं करती, सिस्टम कुछ नहीं करता…
और दूसरी तरफ़ एक 20 साल का लड़का बिना इंतज़ार किए नदी में उतर जाता है।
हाँ, नदी की सफाई की पूरी ज़िम्मेदारी किसी एक युवक के कंधों पर नहीं होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन और सिस्टम की भी ज़िम्मेदारी है।
लेकिन बिट्टू तबाही की कहानी एक बात ज़रूर सिखाती है—
बदलाव के लिए हमेशा भीड़ की ज़रूरत नहीं होती…
कभी-कभी एक इंसान की नीयत ही काफी होती है। ❤️

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