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पेशेवर मंत्रालय और ग़ैर-पेशेवर मंत्री
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भारत-पाक संबंध: आहिस्ता चलिए!
पाकिस्तान से बातचीत का विरोध की जगह स्वागत होना चाहिए, मगर यह भी हक़ीक़त है कि बिना किसी ठोस शुरुआत के सीधे-सीधे उनके प्रधानमंत्री को बुलाने से पब्लिसिटी के अलावा कुछ भी हासिल नहीं होगा। अगर रिश्तों को ठीक करना है तो इसके लिए कोशिश दोनों तरफ से होनी चाहिए। आंखमूंद कर और एकदम से विश्वास नुक्सान दे सकता है, पुराना अनुभव भी इसका गवाह रहा है।
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क्या EVM हैक करना संभव है?
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चुनाव, सर्वेक्षण और रियेक्शन
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क्या चुनावी सर्वे भी फिक्स होते हैं?
हालाँकि पिछले कई चुनाव से यह सर्वे का काम चल रहा है, मगर अक्सर चुनाव के नतीजे इन सर्वों के उलटे ही होते हैं, चैक करने के लिए देश में हुए पुराने चुनावों के नतीजों और सर्वे पर नज़र डाली जा सकती है। पिछले दिनों सर्वे एजेंसियों पर हुए स्टिंग ऑपरेशन से भी इस फिक्सिंग का खुलासा हो चूका है।
मेरे हिसाब से तो हमारे देश के चुनावी सर्वे हर इलेक्शन में किसी ना किसी पार्टी के द्वारा जनता का ब्रेनवाश करने की कोशिश से अधिक कुछ भी नहीं है।क्या ऐसे में आपको लगता है कि इस तरह के सर्वे विश्वसनीय हो सकते है?
नफ़रत हमारा रास्ता नहीं है
देश के मुसलमानों को अब सोच बदलनी होगी
देश के मुसलमान यह सोच कर वोट देते हैं, हम जिसे वोट देकर जिताएंगे वोह हमारी मदद करेगा। मगर अब ज़रूरत इस बात की है कि हम यह सोच कर वोट करें कि किसको वोट देना क्षेत्र और देश के भविष्य के लिए कम से कम दूसरे से बेहतर हो सकता है।
समर्थक' और 'अंध-भक्त' में फर्क
'नमाज़' अर्थात वास्तविक जीवनशैली का तरीका
क्या तुम उसे जानते हो जो दीन को झुठलाता है? वही तो है जो (खुद) अनाथ को धक्का देता है और (दूसरों को) मोहताज के खिलाने पर उकसाता भी नहीं है।
क्या अभिव्यक्ति की स्वंत्रता के नाम पर शाब्दिक हिंसा की इजाज़त दी जा सकती है?
क्या किसी को भी यह अधिकार हो सकता है कि वोह किसी को भी थप्पड़ मारे? नहीं ना? फिर अगर शारीरिक हिंसा की इजाज़त नहीं दी जा सकती है तो शाब्दिक हिंसा की इजाज़त किस आधार पर दी जा सकती है? किसी को भी कैसी भी बेबुनियादी / झूठी / अतार्किक नफ़रत फैलाने वाली बातें कहने का अधिकार हरगिज़-हरगिज़ नहीं होना चाहिए... यह सब बातें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा में कैसे आ सकती हैं?







