मिलने-मिलाने की आड़ में,
आपस में दिल मिलते रहे
बस 'प्रेम रस' बढ़ता रहे,
यूँ इश्कियां फूल खिलते रहे.
अगर बात अपनी कहूँ, तो हर एक ब्लॉगर मीट में बहुत कुछ सीखने का मौका मिला है. आभासी दुनिया से निकल कर असल दुनिया में ब्लॉगर बंधुओं से मिलने पर जिम्मेदारियों का एहसास हुआ. इस बार भी कई साथियों से तकनिकी स्तर पर बहुत सारी सार्थक वार्ताएं हुई. बहुत सी बातें सीखी और बहुत से साथियों को बहुत सारी बातें सिखाने का वादा हुआ. बल्कि मेरे विचार से तो हर एक ब्लॉगर मीट में तकनिकी कार्यशाला का इंतजाम अवश्य होना चाहिए.
चलिए अब चलते 'अजब' सांपला (के ब्लॉगर मिलन) की 'गज़ब' कहानी की ओर:-
हर एक धांसू कहानी की तरह यहाँ भी, धुरंधर 'अजय कुमार झा' की 'धमाकेदार एंट्री'
डायरेक्शन टीम से अंतर सोहिल तथा राज भाटिया जी अजय झा को सीन समझाते हुए
थोड़ी देर बाद ही दूसरी टीम भी लाल कारपेट पर चलने की बेताबी लिए आ पहुंची.
सबसे पहले कैमरों की निगाह ब्लॉगिंग के रजनीकांत 'महफूज़ अली' पर पड़ी
कैमरों को देखने के बाद इनका 'अंदाज़' देखिये ज़रा
उनके पीछे-पीछे श्रीमती संजू तनेजा तथा मुकेश कुमार सिन्हा भी गर्म जोशी से आते हुए दिखाई दिए
आते ही गलियारों में चर्चा शुरू हो गई, हर कोई महफूज़ भाई की इस बेहतरीन शक्सियत की महफूज़गी का राज़ जानने को उत्सुक नज़र आ रहा था और 'वह बताने में'!
(बाएँ से) हँसते रहो फेम राजीव तनेजा, श्रीमती राज भाटिया, श्रीमती संजू तनेजा तथा महफूज़ अली.
अंजु चौधरी से बतियाते महफूज़ भाई
कुछ फोटो खींचने में तो खुछ देखने में मशगूल!
और अजय भाई जायज़ा लेने में मशगूल!
हो जाए एक ग्रुप फोटो
एक और बड़ी सी ग्रुप फोटो!!!
मशहूर चर्चाकार वंदना जी केवल राम से चर्चा करते हुए.
रिश्तों की यह गर्मजोशी तो देखिये
बात और भी आगे बढती हुई...
चेहरों पर मिलने की इतनी ख़ुशी देखने के बाद भी सार्थकता में कुछ कमी रह गयी है क्या?
(जाट देवता के साथ महफूज़)
ब्लॉग्गिंग के गुर सीखते-सीखाते एक छोटी कार्यशाला...
लीजिये नाश्ते का समय हो गया...
हमारे कैमरे की पसंदीदा डिश 'बिस्कुट्स', हालाँकि हमें तो पकौड़े अधिक पसंद आए.
शायद बताया जा रहा है सौ-सौ टिप्पणियों का राज़ :-)
संजू भाभी राजीव तनेजा को समझा रही है कि ज्यादा खर्चा मत करो, अभी थोड़ी देर पहले तो जेब खर्ची दी थी... क्या सब उड़ा दिया?
और महफूज़ भाई का यहाँ कहना है कि ब्लॉग्गिंग का यही मज़ा है, जितना मर्ज़ी पकौड़े खाओ, सेहत फिर भी तंदुरुस्त रहती है...
यह देखिये, दिखा-दिखा कर खाया जा रहा है.
थोड़ी देर से ही सही खुशदीप भाई की टीम भी आ पहुंची, आते ही उनका स्वागत किया इंतज़ार करते कैमरों के फ्लैश ने. इतने कैमरे चलने लगे कि उनको ऑंखें खोलना भी मुश्किल हो गया है जी...
एक शानदार पोज़ देते हुए... (बाएँ से) खुशदीप सहगल, सर्जना शर्मा जी तथा श्रीमती एवं श्री राकेश कुमार जी
लो जी गन्ना प्रतियोगिता शुरू हो गयी है...
फिर से एक ग्रुप फोटो...
श्रीमती एवं श्री राज भाटिया जी मेहमानों का इस्तक़बाल करते हुए...
परेशान मत होइए, यहाँ कुछ गुस्सम-गुसाई नहीं हो रही है... टिप्पणियों के लेन-देन पर चर्चा भी नहीं हो रही है, बल्कि ब्लोगिंग पर गंभीर चिंतन हो रहा है भय्या!!!
लीजिये हम भी आ गए एक ग्रुप फोटो के लिए...
गर्मजोशी यहाँ भी है...
और यहाँ भी...
यह वाला फोटू तो देखिये ज़रा...
एक ग्रुप बैठ कर भी नज़ारा ले रहा है...
और बाहर गन्ना प्रतियोगिता और फोटो सेशन साथ-साथ
चलिए यहाँ भी चर्चा शुरू हो गयी...
गन्ना प्रतियोगिता चालू है...
गन्ना पकड़ कर ब्लॉग चर्चा कैसे की जा सकती है, यही समझा रही हैं वंदना जी श्रीमती भाटिया जी को...
लीजिये अलबेला खत्री जी भी पहुँच गए. संजय भास्कर स्वागत करते हुए...
और पद्म भाई की पद्मवाली का जायजा लेते हुए अजय भाई...
अब बारी आई अपनी-अपनी बात कहने की...
इंदु जी का प्यार और दुलार देखकर ख़ुशी के आंसू झलकने लगे...
देखिये कैसी तन्मयता से सुना जा रहा है...
दूसरी और का द्रश्य भी देख लीजिये...
ब्लॉगप्रहरी कनिष्क कश्यप अपनी बात रखते हुए....
एक अलग अंदाज़....
यह शायद 'मेरे विचार मेरे ख्याल' ब्लॉग वाले सुशील गुप्ता जी हैं...
और जब खुशदीप भाई बोले तो सब एक सुध होकर सुनते ही रह गए....
राजीव भाई ने कहा..... हँसते रहो
अंजु चौधरी बोल रही है और कई कैमरे उनका पीछा कर रहे हैं...
संजू भाभी ने भी अपनी बात रखी....
वंदना जी के समय लाईट थोड़ी कम हो गयी थी...
सर्जना जी भी ब्लोगिंग और मीडिया के कई राज़ खोले...
केवल और केवल 'केवल' भाई...
और आई अब अजय भाई की बारी....
एक-एक पॉइंट कुछ इस अंदाज़ में बयां हो रहा है...
ज़रा यह अंदाज़ तो देखिये..
लीजिये खाना शुरू हो गया...
महफूज़ भाई की सेहत का राज़ तो लगता है कि बस पापड़ खा कर ही काम चलाने वाले हैं.... :-)
अलबेला जी कह रहे हैं कि 'महफूज़ सिर्फ पापड़ खाने से पेट नहीं भरेगा'
बातें छोडो, खाना खाओ यार...
ब्लॉग-चर्चा
कुंवर जी अकेले ही?
अलबेला-शाह
इतनी गभीरता??? या फिर पोज़ देने में शर्मा रहे हैं?
फोटो खिचवाना हो तो ऐसे खीचवाइए ना...
या फिर ऐसे....
(व्यंजना शुक्ल के साथ योगेन्द्र मौदगिल)
सिक्योरिटी का भी पूरा इंतजाम था, हर कोने-कोने पर नज़र रखी जा रही थी... ताकि कोई परिंदा भी पर ना मार सके...
विदाई का समय नज़दीक है...
और यह आखीर वाला पोज़...
कीर्ति नगर मेट्रो स्टेशन पर...
अजय भाई अपने कैमरे के फोटो जांचते हुए....
लीजिये मेट्रो आ गयी...
जब इत्ते फोटो झेल ही लिए हैं तो यह अखीर वाला हमारा फोटू भी झेल लो भय्या...













