कल का मैन ऑफ़ दा मैच!!!

हुरररररररररे!!!!!! हम जीत गए!!!!!!!!!


बहुत-बहुत मुबारक हो!!! सबको मुबारक हो!!! पाकिस्तान को भी मुबारक हो!!! :-) :-) :-) :-) :-)

खुशदीप भाई कह रहे हैं, हर हिन्दुस्तानी की बात!....... हटो, हटो, ऐ श्रीलंका वालों, वर्ल्ड कप अब हमारा है...

धूम-धूम धडाम-धडाम धम्म-धम्म टूंश, फूंश, भड-भड-भड-भड... धिनशा-धिनशा.... फटाक-फटाक... धडाम-धडाम... ठाँ-ठाँ-ठाँ-ठाँ....


[यह वोह बम्ब-पठाखे हैं जो रात जलाएं हैं :-) :-) :-) ]


 
चलिए लगे हाथ आपको यह भी बता देते हैं की कल का मैच किसने जिताया... नीचे उसका फोटो लगा रहा हूँ... पहचानिए????
 
 
 
 
पहचाना क्या???? अरे और कौन होगा? वही ना, जिसका टोटका कल चला है!!!!!!!!!!

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टोटका: आज पाकिस्तानी टीम जीतेगी!

लोग भारतीय टीम के लिए अजीब-अजीब टोटके कर रहे हैं, चलिए एक टोटका अपनी तरफ से भी :-) ... वैसे इसे आप हाजमा ठीक करने की दवा भी कह सकते हैं, 3-4 दिन से हमारे खबरिया टी. वी.  चैनल्स ने जंग छेड़ी हुई है. अच्छी-अच्छी  बातें कुछ ज़्यादा ही कही जा रही हैं और आपको तो पता है ज्यादा अच्छा हज़म करने में थोड़ी परेशानी तो होती ही है. इसलिए सोचा मैच के रिज़ल्ट के पहले हाजमा ठीक कर लिया जाए.

आज हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट विश्वकप का सेमी-फाइनल मैच है (अबे यह क्या बता रहे हो, बच्चे-बच्चे को पता है यार. वैसे इस मैच से एक बात और पता चल गई की अपने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कोई गिलानी जी हैं). अगर दोनों टीमों की तुलना की जाए तो एक तरफ हमारी टीम अंतराष्ट्रीय रैंकिंग पर नंबर 6 पर आती है और पाकिस्तान की टीम नंबर 2 पर. इससे पता चलता है कि हमारी टीम कितनी कमज़ोर है इस मुकाबले में. जहाँ पाकिस्तान की बल्लेबाजी उनकी ताकत है तो वहीँ हमारी गेंदबाजी कुछ मज़बूत दिखाई दे रही है. एक तरफ हमारी टीम के कमज़ोर बल्लेबाज़ सचिन, सहवाग और युवराज पहले ही खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं, लेकिन हमारे पास कप्तान धोनी और पठान जैसे धुरंधर बल्लेबाज़ भी हैं, जो कि इस टूर्नामेंट में लगातार अच्छी फॉर्म दिखा चुके हैं. अगर गेंदबाजी का विश्लेषण करें तो ज़हीर और अश्विन ने ज़रूर पिछले कुछ मैचों में निराश किया है, लेकिन अच्छी बात यह है कि विश्व के सबसे सफल तेज़ गेंदबाज़ में शुमार हमारे मुनाफ, नेहरा और फिरकी गेंदबाज़ हरभजन बहुत अच्छी फॉर्म में हैं. फील्डिंग के क्षेत्र में भी हमारे खिलाड़ियों ने पिछले मैचों में बहुत निराश किया है.

दूसरी तरफ पाकिस्तान बल्लेबाज़ी विश्व में नंबर एक  पर मानी जाती है, किस किस का नाम लूं, सारे के सारे एक से एक बढ़कर हैं (अबे नाम नहीं याद आ रहे हैं तो बहाना क्यों बना रहा है) यहाँ तक कि विश्व कप में भी धमाल दिखा रही है. मुझे लगता है कि शाहिद अफरीदी, शोएब अख्तर और उमर गुल जैसे कमज़ोर गेंदबाजों की कमियों को उनकी बल्लेबाजी पूरा कर लेगी. वैसे भी पाकिस्तानी टीम फील्डिंग के क्षेत्र में पुरे विश्व में मशहूर है, फिर उनके देश के राष्ट्रपति भी हौसला अफजाई के लिए आ रहे हैं. हमारे प्रधानमंत्री ने पहले ही टीम को कह दिया होगा कि आपको पाकिस्तान से हमारी गहरी दोस्ती की कसम आज उनकी टीम को निराश मत करना. वैसे भी दोस्ती की कीमत पर विश्वकप ले भी लिया तो क्या फायदा? हमें अपनी महानता का परिचय देते हुए अपने देश के मेहमानों का सम्मान करना चाहिए...

समाप्त...


वैसे पोस्ट अब समाप्त हो चुकी है,  अब आप मुझे जितना चाहे 'अपशब्द' कह सकते हैं. आपका हक बनता है भाई!






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लो हो गया एक साल का 'प्रेम रस'

'प्रेम रस' को बने हुए आज एक साल पूरा हो गया. जब मैं अपने इस एक साल का आकलन करने बैठा तो पाया कि यह मेरे जीवन का सबसे बेहतरीन साल था. जहाँ इस साल ने मुझे व्यस्तता भरे जीवन में अपने लिए समय निकालने का मौका दिया, वहीँ एक से बढ़कर एक बेहतरीन दोस्त बनाने का मौका भी मिला. हालाँकि ब्लोगिंग की शुरुआत तो मैंने 2007 में इंग्लिश ब्लोगिंग के रूप में की थी लेकिन बचपन से ही हिंदी से लगाव मुझे हिंदी ब्लोगिंग की ओर खींच लाया। 2009 में हिंदी ब्लॉग तो बना लिया था लेकिन ब्लॉग संकलकों के बारे में जानकारी ना होने के कारण बहुत कम लोगो तक ही मेरा ब्लॉग पहुँच पाया। फिर ब्लॉगवाणी और चिटठाजगत का पता चला, इन्हें देख कर ही हिंदी ब्लोगिंग का जूनून चढ़ा। एक वर्ष पहले 'प्रेम रस' ब्लॉग बनाया और ठीक आज ही के दिन पहली पोस्ट "उर्दू और हिंदी अलग-अलग नहीं है!" इस पर डाली. चिटठा जगत ने तो तत्काल प्रभाव से प्रेमरस को शामिल कर लिया, ब्लॉगवाणी ने थोडा सा समय लिया लेकिन उन्होंने भी उसी दिन शामिल कर लिया.

मुझे आज भी याद है आनंद का वोह पल जब मेरे इस ब्लॉग पर पहली बार किसी की टिप्पणी आई, और वह टिप्पणी थी आदरणीय इस्मत ज़ैदी जी की.

इस्मत ज़ैदी said...
बिल्कुल सही कहा आपने ,उर्दू और हिंदी बहनें ही हैं ,दोनों अपनी अपनी जगह बहुत महत्वपूर्ण और ख़ूबसूरत हैं


यह टिप्पणी महत्वपूर्ण इसलिए भी थी कि 2-2.5  साल में पहली बार मेरे किसी ब्लॉग पर कोई टिप्पणी आई थी और इसके बाद टिप्पणियों का सिलसिला शुरू हो गया था. मैं इसके लिए ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत का आभार व्यक्त करता हूँ, कि उन्होंने मुझे और लोगो के सामने अपने लेखनी को पेश करने का मौका दिया. वर्ना पाठक गूगल से अपने काम से सम्बंधित सूचना सर्च करते हुए आते थे और बिना कोई सन्देश, चर्चा, पसंद-नापसंद बताए हुए ही चले जाते थे.

हालाँकि अपने इस ब्लॉग से पहले ही मैं ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत से अवगत हो गया था. इससे पहले, मैं ऑरकुट पर बनी हिंदी कम्युनिटी का मोडरेटर था और पिछले 2-3 साल से ऑरकुट पर ही लिखता था. वहीँ मेरी मुलाक़ात उमर कैरान्वी भाई से हुई जिन्होंने मुझे ब्लॉगवाणी के बारे में बताया. भौचक्का रह गया था उस दिन ब्लॉगवाणी देख कर, एक साथ, एक जगह, इतने सारे अच्छे-अच्छे लेख / रचनाएं देख कर कैसा महसूस हो रहा था, शब्दों में उस अहसास को व्यक्त नहीं कर सकता हूँ. आज भी उमर भाई का इस तोहफे के लिए आभारी हूँ. ब्लॉगवाणी के संस्थापक मैथिलि जी को पहले से ही जानता हूँ, जबसे आर्ट्स की लाइन में आया हूँ उनके द्वारा इजाद किये गए हिंदी के फोंट्स प्रयोग करता आ रहा हूँ. जब पता चला कि ब्लॉगवाणी भी उनका ही प्रयास है, तो उनके लिए दिल में अपार सम्मान और भी बढ़ गया.

इस एक साल की मेरे दिल में कई खट्टी-मीठी यादें हैं (खट्टी ना के बराबर और मीठी इतनी ज्यादा की डर लगने लगता है.... आजकल ज्यादा मीठा नुक्सान जो पहुंचाने लगा है, :-) शुगर जैसी बीमारियों का फैशन सा चल गया है!!!!! ). इंसान के लिए पूरा जीवन ही पाठशाला होता है, हर कदम पर कुछ ना कुछ सीखने को मिलता है और ब्लॉग जगत से तो मुझे काफी कुछ सीखने को मिला है, खासतौर पर इसने मुझे जवाबदेह बनाया है, इसकी यही खूबी है कि पाठक आपके लेख पर संवाद कर सकते हैं, जो कि मीडिया के अन्य संस्करणों में नहीं हैं और इसीलिए इसे न्यू मीडिया कहा जाने लगा है।

यहाँ पर बने दोस्तों की सूची बहुत लम्बी है, हर एक हिंदी ब्लोगर अपना लगता है. हर एक ब्लोगर को मैं अपना साथी मानता हूँ और चाहता हूँ कि ब्लॉग जगत की कामयाबियों का यह कारवा यूँ ही बढ़ता चला जाए... अमीन!

(साल भर में  83 पोस्ट पर पाठकों की कुल संख्या इस समय तक 26800 रही. नीचे साल भर की टिप्पणियों का लेखा जोखा भी दिया है. कुल मिला कर 1908 टिप्पणियां ऐसी हैं जिन्हें साल भर में स्वीकृत किया गया हैं.)

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एनडीटीवी शो 'हम लोग' पर ब्लॉगर्स

ब्लॉग जगत को इलेक्ट्रोनिक मीडिया के द्वारा दुनिया के सामने लाने के इरादे से कुछ ब्लोगर बंधू जुटे एन.डी.टी.वी. शो 'हम लोग' पर, जिसमें मेरे अलावा अविनाश वाचस्पति जी, राजीव तनेजा जी तथा सतीश चौपडा जी शामिल थे. जब सवाल उठा की क्या हास्य समाप्त होता जा रहा है तो अविनाश जी ने कहा कि आप ब्लॉग की दुनिया में आकर देखिये यहाँ पर व्यंग्य लिखने वाले बहुत अधिक हैं, जो कि बहुत अच्छा लिखते हैं और उन्हें देश ही नहीं विदेशों में भी पढ़ा जा रहा है... [इसमें उन्होंने उदहारण के तौर पर राजीव तनेजा और मेरा ज़िक्र किया, हालांकि मेरा नाम शाहरुख़ कह गए :-) बाद में ठीक भी बोले लेकिन एडिटर ने एडिट कर दिया :-) शायद उसको शाहरुख़ नाम ज्यादा अच्छा लगा], राजीव जी ने दावा किया कि उनके ब्लॉग 'हँसते रहो' में आजकल चल रहे लाफ्टर शोज़ से अधिक हास्य है, वहीँ मैंने बताया कि ब्लॉग जगत में एक से बढ़कर एक प्रतिभा छुपी हुई है, जो कि सामने नहीं आ पा रही है, आवश्यकता उन्हें आगे लाने की, हालाँकि हमारी कुछ और बातचीत एडिटर ने एडिट कर दी. वहां पर मेरी मुलाकात एक और ब्लॉगर सतीश चौपडा जी से हुई, उन्होंने सुनील पाल से सवाल दागा कि हास्य टी. वी. शो में स्तर क्यों गिर रहा है? इस पर उन्होंने सतीश जी को रजनीकांत से मिला कर बात को टालने की कोशिश की, हालाँकि बाद में कहा कि दर्शक ऐसे शोज़ देखना बंद कर दें तो यह सब अपने आप समाप्त हो जाएगा. मतलब, उनका साफ़ कहना था कि लोग जो पसंद करते हैं वही दिखाया जाता है. 

इस शो में कार्टूनिस्ट इरफ़ान भाई, श्री अशोक चक्रधर जी, श्री कुंवर बैचेन जी, रेडियो जोकि नितिन तथा जामिया के पूर्व वाइस चांसलर शाहिद मेहँदी जी चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल थे. 

ब्लॉग जगत पर काफी लोगो की नज़र है, इसका एक और प्रमाण तब मिला जब मेहमानों से बातचीत में उन्होंने हमारे ब्लॉग को झट से पहचान लिया. वहीँ पंकज पचौरी जी से ऑफ़ रिकोर्ड बातचीत में जब मैंने उनसे कहा कि ब्लॉग जगत में बहुत प्रतिभाएं हैं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया जाता है, तो उन्होंने मेरी बात से नाइत्तेफाकी ज़ाहिर करते हुए बोला कि ब्लॉग जगत को पढ़ा जा रहा है, तभी तो हमने आप लोगो को यहाँ बुलाया है. उनकी टेक्नीकल टीम से बातचीत में हमें यह भी पता चला कि हम लोगो को इस शो के लिए नुक्कढ़.कॉम के ज़रिये बुलाया गया था, मतलब अपना नुक्कढ़ मीडिया जगत में भी काफी मशहूर है.

आज रात 8.00 बजे प्रसारित हुए इस शो का विडिओ उम्मीद है सुबह तक यू-ट्यूब पर बने एन.डी.टी.वी. के अकाउंट पर अपलोड हो जाएगा. मैंने अपने मोबाइल से भी विडिओ बनाया है, परन्तु इंटरनेट बहुत सुस्त होने के कारण अपलोड नहीं हो पा रहा है, सुबह फिर से कोशिश करूँगा.







मेरे मोबाइल से बनी विडिओ क्लिप




पूरा विडिओ यहाँ देखिये.




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मेरा जन्मदिन और होली

ब्लॉग जगत के सभी साथियों तथा समस्त देशवासियों को होली पर हार्दिक शुभकामनाएं! 

वैसे होली का दिन हर वर्ष ही मेरे लिए ख़ास होता है, क्योंकि मेरा जन्म चैत्र माह में होली के दिन ही हुआ था... अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार ज़रूर 15 मार्च को होता हो लेकिन हमारे कैलेण्डर के अनुसार तो मेरा जन्मदिन आज ही है... क्या करें हम लोग इतनी तरक्की कर रहे हैं कि अपने कैलेण्डर को ही भूल बैठे हैं... :-( 

चलिए बुरा मत मानिये... 



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चोरी हो रहे हैं लेख / रचनाएं

आज अचानक अपनी ग़ज़ल "मायूसियों से अकसर भर जाती है ज़िन्दगी" को गूगल सर्च में डाला तो हक्का-बक्का रह गया, मेरी ग़ज़ल को कई लोगो ने अपने ब्लॉग पर सजा रखा था. चलिए बाकी ने तो साथ में मेरा नाम लिखा था, परन्तु किन्ही "Kanika Gupta" ने तो मेरा नाम भी लिखना गंवारा ना किया. और यह देख कर तो मेरी हैरानी की सीमा ही नहीं रही कि किन्ही "gunjan" ने मेरी यह ग़ज़ल अपने ब्लॉग पर "Kanika Gupta" के नाम से लिख डाली. वहीँ "blalster" ने भी इस ग़ज़ल को बिना मेरा नाम लिए ही इस्तेमाल कर लिया, आप भी देखिये...


इसके बाद मैंने उत्सुकतावश कुछ और खोज की तो पता चला कि यही नहीं बल्कि कई और रचनाओं और लेखों को भी इसी तरह मेरे ब्लॉग से उड़ाया गया है और वह भी बिना मेरे नाम का उल्लेख किये.

कुछ और उदहारण देखिये:


उपरोक्त लेखों / रचनाओं पर तो मेरी नज़र पड़ गई, बहुत से छूट भी गए होंगे. बल्कि यह भी हो सकता है कि प्रिंट मीडिया में भी लेख / रचनाएं बिना लेखक का नाम प्रयोग किये, अथवा किसी और के नाम से या फिर बिना हमें सूचित किए यूँ ही छापते होंगे? क्योंकि प्रिंट मीडिया के लिए तो आप गूगल सर्च भी नहीं कर सकते हैं.

यह सब रुकना तो चाहिए, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह आखिर रुकेगा कैसे?



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स्टार न्यूज़ पर कार्टूनिस्ट इरफ़ान

कार्टूनिस्ट की नज़र से क्रिकेट मैच को दिखाने का एक अलग और बहुत ही बेहतरीन प्रयास किया है स्टार न्यूज़ ने. क्रिकेट विश्वकप 2011 में भारतीय टीम के हर मैच में, देश के मशहूर कार्टूनिस्ट 'इरफ़ान', चल रहे मैच के विशेष क्षणों पर आधारित अपने कार्टून्स लेकर, मैच के समय स्टार न्यूज़ पर उपस्थित होते हैं... आप भी देखिये इसकी एक झलक.


भारत - पाकिस्तान सेमी फाइनल मैच - 2





भारत - पाकिस्तान सेमी फाइनल मैच




भारत और दक्षिण अफ्रीका मैच





भारत और नीदरलैंड मैच





भारत आस्ट्रेलिया क्वार्टर फाइनल मैच


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झा जी को पढ़ रही है भारतीय टीम?

भारतीय टीम जानती है कि क्रिकेट विश्व कप कैसे जीतना है... देखिये प्रेक्टिस कितनी ज़बरदस्त चल रही है मैदान में...... होली की :-)





वैसे गलती इनकी भी क्या है? होली का खुमार तो इनपर भी है :-)  लगता है आजकल प्रेक्टिस की जगह अजय झा जी की पोस्ट अधिक पढ़ रही है भारतीय क्रिकेट टीम!!!

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कस्टमर केयर गर्ल से बातचीत!

अक्सर ही लोगों के पास किसी न किसी कंपनी से फ़ोन आता रहता है और दूसरी और से मधुर आवाज़ में कस्टमर केयर गर्ल ऐसे अंदाज़ में बात करती हैं  कि नापसंद चीज़ भी खरीद ली जाती है....

देखिये कैसे एक मशहूर हिंदी ब्लोगर इंग्लिश के फेर में परेशान हो रहा है..... या फिर कर रहा है!!!!

आवाज़ सुनकर पहचानिए कि आपको यह किसकी आवाज़ लग रही है???


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क्या हैं अरब देशों की क्रांति के मायने

"दशकों से तानाशाही झेल रहे लोग अब देखना चाहते हैं लोकतंत्र"

कट्टरपंथ में जकड़े एवं तानाशाही का दंश झेल रहे अरब महाद्वीप की जनता में अचानाक आए गुस्से के इस उबाल के गहरे मायने हैं, जिसके चलते तानाशाहों की सत्ता की चूलें हिलने लगीं हैं। पुरे अरब महादीप में फैले इन तानाशाओं को जनता जनार्दन के इशारों को समझ कर अपने आप ही सत्ता से दूरी बना लेनी चाहिए। दिसंबर माह में मोहम्मद बौजीजी के आत्मदाह करने के बाद ट्यूनीशिया  की जनता में सरकार के खिलाफ क्रांति की चिंगारी भड़क उठी थी। खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, बेरोजगारी और अन्य समस्याओं के कारण मध्य जनवरी तक धरना-प्रदर्शनों का दौर जारी रहा। 


राष्ट्रपति जैनुअल अबीदेन बेन अली 23 साल तक ट्यूनीशिया की सत्ता पर काबिज़ रहे, आखिरकार जनता ने जैस्मीन क्रांति के द्वारा ऐसा सबक सिखाया कि देश छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा। क्रांति की यह फिज़ा उत्तर अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया से मिस्र तक कब पहुँच गई किसी को खबर ना हुई। मिस्र के लोग भी तानाशाही को तीस वर्षो से झेलते-झेलते थक चुके थे। जैस्मीन क्रांति से उन्हें भी एक नई राह दिखाई दी, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी एवं भुखमरी से त्रस्त मिस्र के जनता ने तानाशाही और दमन के खिलाफ बिगुल बजा कर मुबारक सरकार को उखाड़ फैका।


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हालाँकि हुस्नी मुबारक ने कई सुधार-वादी कदम उठाए थे, जिसके तहत कैबनेट को भंग करके वायुसेना प्रमुख को प्रधानमंत्री तथा गुप्तचर प्रमुख को उपराष्ट्रपति बनाया गया।  लेकिन लोगो के गुस्से की आग शांत होने की जगह और भी अधिक भड़कती गई, क्योंकि उनके मन में तानाशाही से छुटकारे की उमंगें अंगडाइयां ले रही थी। चौकाने वाली बात यह थी सउदी अरब शाह के हुस्ने-मुबारक और बेन अली के समर्थन में उतर आने का भी दोनों देशों की जनता पर कोई फर्क नहीं पड़ा। ट्यूनीशिया से शुरू हुई इस आग की तपिश धीरे-धीरे यमन और जोर्डन में भी महसूस होने लगी है। असंतोष और राजनीतिक बदलाव की यह बयार मिस्र के बाद अब जंगल की आग की तरह मध्य-पूर्व देशों में फैलती जा रही है। मिस्त्र और टयूनीशिया में लोगों के धरना-प्रदर्शनों से मिली कामयाबी को देखते हुए मध्य पूर्व के अन्य देशों की जनता को भी इस राह पर कामयाबी नज़र आ रही है।


यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ल सलेह को भी घोषणा करनी पड़ी कि वर्ष 2013 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में वह शामिल नहीं होंगे। बीस वर्षो तक शासन करने वाले सलेह पिछले तीन हफ्तों से लोगों के धरना-प्रदर्शन का सामना कर रहे है। यह देखना रोचक होगा कि राष्ट्रपति द्वारा दी गई रियायतों से लोग कहां तक प्रभावित होते है! प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सुधार को लेकर किए गए वादें लागू हों। उधर जॉर्डन की जनता भी पूरी तरह से राजनीतिक बदलाव के लिए जूझ रही है। जार्डन में लोगों के विरोध प्रदर्शनों के भय से शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने सुधारों को लागू करने के लिए नई सरकार की जरूरत बताते हुए अपने पूरे मंत्रिमंडल को भंग करके नई सरकार के गठन करने की घोषणा की थी।


लीबिया के राष्ट्रपति कर्नल गद्दाफी तो जनता के द्वारा किये जा रहे प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से कुचलने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। लीबिया में हुए खून-खारबे की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई आलोचना पर उन्होंने कहा कि उन्हें किसी की आलोचना की परवाह नहीं है। इस बीच उनके देश छोड़कर भाग जाने की अफवाहें भी उडती रही। उन्होंने अपने समर्थकों से बाहर आने और सड़कों की सुरक्षा करने का आह्वान किया है, हालाँकि उनके इस आह्वान से देश में हिंसक मुठभेड़ों की आशंका बढ़ गई है। देखने वाली बात यह है कि वह कब तक जनता की उम्मीदों के खिलाफ सत्ता पर ज़बरदस्ती कब्ज़े को बरकरार रख पाते हैं।


सीरिया में अभी प्रदर्शनकारी सड़कों पर नहीं आए है लेकिन सोशल नेटवर्किग वेब साईट्स  पर लोगों में सरकार विरोधी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार सीरियावासी भी आजादी और नागारिक अधिकारों को हासिल करना चाहते है। सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असाद का कहना है कि असंतुष्टों से उन्हे कोई भय नहीं है क्योंकि उनकी सरकार लोगों के सहयोग से चल रही है। सुडान के राष्ट्रपति उमर अल बसीर को भी हाल ही में हुए जनमत संग्रह से गहरा झटका लगा है जिसमें अधिकतर लोगों ने उत्तरी सुडान से अलग होने की इच्छा जताई थी।

अरब देशों के तानाशाहों से त्रस्त आ चुकी जनता के गुस्से के उबाल में शासकों के भ्रष्टाचार और अमेरिका के वरदहस्त ने आग में घी का काम किया है। ज्ञात रहे कि 1979 में ईरान के शाह रजा पहलवी को भी इसी तरह सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। अमेरिका सहित पश्चिम जगत में यह भी आशंका जताई जा रही है कि प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तनों का फायदा मिस्र के मुसलिम ब्रदरहुड जैसे कट्टरपंथी संगठन ना उठा लें। हालाँकि इन संगठनों ने अभी तक सत्ता पाने की हड़बड़ी नहीं दिखाई है। बात अगर मुस्लिम ब्रदरहुड की करें तो मिस्र में प्रतिबंधित यह संगठन अरब जगत के सबसे पुराने इस्लामी संगठनों में से एक है। ज्ञात रहे कि अरब देशों के सभी कट्टरपंथी संगठन अमेरिका के धुर-विरोधी है, शायद इसीलिए अमेरिका नहीं चाहता कि सत्ता परिवर्तनों  की सूरत में कट्टरपंथी संगठनों को नेतृत्व का मौका मिले। मिस्र के मुसलिम ब्रदरहुड और लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला में आंतरिक सम्बन्ध है, वहीँ इन दोनों के गाजा के हमास जैसे अन्य चरमपंथी संगठनों से गहरे सम्बन्ध हैं। अमेरिका कि चिंता यह है कि अगर सत्ता की कमान इनके हाथों में आई तो पूरे क्षेत्र में इजरायल विरोधी लहर फैल सकती है। मुसलिम ब्रदरहुड सन 1928 में स्वरुप में आया था, इस संगठन पर मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति कर्नल नासिर की हत्या की कोशिश और राष्ट्रपति अनवर सदात की हत्या जैसे संगीन आरोप हैं। पूर्व राष्ट्रपति मुबारक ने मुस्लिम ब्रदरहुड पर बैन लगा रखा था, हालांकि संगठन इन आरोपों को खारिज करता है। दिलचस्प बात यह कि प्रतिबन्ध के बावजूद 2005 में हुए चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों के सहारे ब्रदरहुड ने 20 फीसदी सीटों पर कब्जा किया था। 

इन सब अटकलों के बीच बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस क्रांति से यह मतलब निकला जाए कि अरब देशों की जनता भी इंडोनेशिया अथवा मलयेशिया की तरह लोकतंत्र की ओर बढ़ रही है?

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