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मेरे वतन में तो 'मज़हब' हैं दोस्ती के लिए...

यह हमारा हिन्दोस्तां है, जहाँ मज़हब दोस्ती का सबब है, जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग साथ रहते हैं, खाते हैं, पढ़ते हैं और साथ ही अपनी-अपनी पूजा भी कर लेते हैं....

हज़ारों साज़िशें कमतर हैं दुश्मनी के लिए
मेरे वतन में तो 'मज़हब' हैं दोस्ती के लिए
- शाहनवाज़ 'साहिल'


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उन जवानों का कर्ज़ा चुकाएंगे कब?

सियाचिन ग्लैशियर में हिमस्खलन से हुई हमारे जवानों शहादत की खबर ग़मगीन कर गई! देश की हिफाज़त की ख़ातिर सरहदों पर लड़ने वाले हमारे जवानों की जज़्बे और शहादत को सलाम...


हम यूँ आज़ादियों की हर इक जद में हैं
क्योंकि क़ुर्बानियाँ उनके मक़सद में है

उन जवानों का कर्ज़ा चुकाएंगे कब?
जो हमारी हिफाज़त को सरहद पे हैं

- शाहनवाज़ 'साहिल'

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