औरंगज़ेब सिर्फ एक शासक था

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  • Shah Nawaz
  • औरंगज़ेब भी दूसरे राजाओं की तरह एक शासक ही था, जिसके अंदर बहुत सारी खूबियाँ थीं और ऐसे ही बहुत सारी कमियाँ भी थीं, पर उन खूबियों और कमियों का देश के मुसलमानों से कोई ताल्लुक़ नहीं है। भले ही उसने किताबें लिखकर और रस्सियां बुनकर अपना खर्च चलाने जैसा बेहतरीन काम होगा, पर सत्ता की लड़ाई में अपने सगे भाइयों...
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    साम्प्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता की राजनीति और इसका नुक़सान

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  • Shah Nawaz
  • मैं अपने बचपन से चुनावों में सांप्रदायिक नफरत का चक्रव्यूह देखता आ रहा हूं। चुनाव करीब आते ही बीजेपी तुरंत हिन्दू मुस्लिम पर और कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियां जनता के कामों पर सवाल करने या हिसाब-किताब देने की जगह बीजेपी के चक्रव्यूह में फंसकर उसके एजेंडे पर बात करती नज़र आती हैं। यह दोनों तरफ़...
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    आप कारोबार में जितना ज़्यादा मेहनत करते हैं उतना ही कम कमाते हैं

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  • Shah Nawaz
  • जब आप अपने कारोबार में ज़्यादा मेहनत करते हैं तो उसके दो नुकसान होते हैं, एक तो कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी नेटवर्क को बनाने के साथ-साथ बाकी कारोबार में इन्वेस्ट करने का टाइम नहीं निकल पाते हैं और दूसरा ख़ुद को और परिवार को टाइम कम देने की वजह से क्वालिटी ऑफ लाइफ नहीं जी पाते हैं। अगर जिंदगी...
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    मुस्लिम प्रजनन दर और उसकी आड़ में जनसंख्या वृद्धि के हौव्वे की राजनीति

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  • Shah Nawaz
  • भारत में मुस्लिम प्रजनन दर 1992 में 4.4 थी जो कि 2019 में गिरकर 2.4 हो गई। वहीं हिन्दू प्रजनन दर जो कि 1992 में 3.3 थी वो 2019 में गिरकर 1.9 हो गई है। अगर सरकार के इस आंकड़ें को देंखेंगे तो मुस्लिम प्रजनन दर में जितनी तेज़ी से गिरावट आई है, उतनी किसी और समाज में नहीं आई है।अभी सभी समुदायों की प्रजनन...
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    Ghazal: जहाँ के दर्द में डूबी है शायरी अपनी

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  • Shah Nawaz
  • वो जिसकी याद में कटती है ज़िन्दगी अपनी उसी के साथ में शामिल है हर खुशी अपनी वो लिखना चाहें तो लिक्खे तेरी अदाओं पे जहाँ के दर्द में डूबी है शायरी अपनी नया है दौर ये ज़ालिम बड़ा ज़माना है ज़रा जतन से छुपाना तू मुफलिसी अपनी मिरे कदम से मिलाया है हर कदम उसने हर इक सफर में हुई है यूँ रहबरी अपनी - शाहनवाज़...
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    कोरोना मामलों में मीडिया का धार्मिक दुष्प्रचार

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  • Shah Nawaz
  • 24 मार्च तक बहुत सारे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों में लोग सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद आ-जा रहे थे और इस कारण लॉक डाउन होने पर फंस गए। क्योंकि तब तक सरकार ही गंभीर नहीं थी, प्रदर्शन चल रहे थे, सामाजिक-राजनैतिक समारोह / पार्टियाँ आयोजित हो रही थीं, सरकारें गिर रही, बन रही थीं, संसद सत्र चल रहा था। सरकारी गंभीरता अचानक 20-21 मार्च से नज़र आनी शुरू हुई। हजूर साहिब, महाराष्ट्र में फंसे ऐसे ही तीर्थयात्री...
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    मज़बूत लोकतंत्र और भारतीय संस्कृति का संगम विश्व को नई राह दिखा सकता है

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  • Shah Nawaz
  • यह बेहद फख्र की बात है कि हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं। मतलब देश के हर हिस्से में किसी ज़ोर-ज़बरदस्ती की नहीं बल्कि जनता की मर्ज़ी से चुनी हुई सरकार प्रशासक का काम करती है। देश के किसी भी हिस्से में चाहे किसी भी दल की सरकार हो, वो उस हिस्से के हर नागरिक की सरकार होती है। और हर नागरिक का यह फ़र्ज़ है कि नीचा दिखाने की नीयत की जगह सुधार की नीयत से कमियों को सामने लाए। जो कि किसी भी सरकार के पक्ष...
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    गुजरात से आए कोरोना आंकड़ों ने चिंता बढ़ाई, कहीं दूसरे राज्यों में भी यही हाल ना हो!

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  • Shah Nawaz
  • गुजरात में कोरोना का कहर अचानक से बहुत तेज़ी से नज़र आ रहा है, 5 दिन पहले तक देश में छठे नंबर पर चल रहा गुजरात 2400 से ज़्यादा केसेस के साथ दिल्ली को पीछे करते हुए दूसरे नंबर पर आ गया है। हालांकि दिल्ली में कोरोना केसेस की संख्या इसलिए भी अधिक नज़र आती है, क्योंकि यहाँ दिल्ली से बाहर के केसेस ही अधिक हैं, दिल्ली के केसेस बहुत ही कम हैं। चिंता की बात यह है कि गुजरात में रिकवरी रेट मात्र 6% के आसपास...
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    अपने-पराए हर गलत को गलत कहिए

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  • Shah Nawaz
  • ना तो सारे मुसलमान जमाती होते हैं और ना ही हर जमाती को कोरोना हुआ है और ना ही जमाती जानबूझकर बीमार हुए हैं। जो गलती मैजमेंट से हुई हो उसकी सज़ा भी उनकी जगह बीमारों को नहीं दी जा सकती है, बल्कि बीमारों के साथ सहानुभूति होनी चाहिये। हालांकि जैसी गलती मरकज़ मैनजेमेंट से हुई, वैसी गलती कम हो...
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    भारतीय मुस्लिम्स को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा

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  • Shah Nawaz
  • जापान पर अमेरिका द्वारा परमाणु बम गिराए जाने और ज़मीन पर कब्ज़ा करने के बाद जापानियों ने कब्जा छुड़वाने के लिए कोशिशें करने की जगह शिक्षा का 20 वर्षीय मॉडल तैयार किया। और उसका परिणाम यह हुआ कि 1971 आते-आते जापान तकनीक में इतना आगे निकल गया कि अमेरिका को स्वयं ही जापान के शहरों से कब्ज़ा हटाना पड़ा। दूसरी...
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